बवाना विधानसभा उपचुनाव में क्यों हारी भाजपा ?

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दिल्ली के बवाना विधानसभा उपचुनाव परिणाम का असर दिल्ली की राजनीति पर तो पड़ना तय था ही। साथ ही तीनों पार्टियों के प्रमुख नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल भी बना हुआ था। ‘आप’ ने यहाँ से बम्पर जीत हासिल कर सिद्ध कर दिया की अभी प्रदेश में अरविन्द केजरीवाल का असर बाकी है। बीजेपी और कांग्रेस ने “आप ” पर भ्रष्टाचार और मनमानी को लेकर जमकर हमले किये , लेकिन इस बम्पर जीत ने आप का आत्मविश्वाश बढ़ा दिया और अरविन्द केजरीवाल का कद भी बढ़ा दिया है। इस चुनाव में “आप ” को 59,886 वोट मिले हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और  नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे। केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय नेताओं के दौरे भी हुए। चर्चा है की इस चुनाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित साह पूरी नजर रखे हुए थे। चुनाव प्रचार के दौरान ही बीजेपी यह मान चुकी थी कि वेद प्रकाश की निगम चुनाव से पहले “आप ‘ से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल करना बड़ी रणनीति नहीं, बल्कि पार्टी की भारी भूल थी। दूसरे नंबर पर आयी बीजेपी को इस चुनाव में महज 35,834 वोट मिलें है। इस चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देने में भी बीजेपी खुद को सहज महसूस नहीं कर रही है। वहीं बवाना विधानसभा उपचुनाव में तीसरे नंबर पर रही कांग्रेस के लिए भी विधानसभा में एंट्री का सुनहरा मौक़ा था, जो पार्टी ने गंवा दिया।

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