कहां हुई मुर्दे की एंजियोग्राफी ?

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रोहिणी सेक्टर 3 स्थित जयपुर गोल्डल अस्पताल में रोहिणी सेक्टर 11 निवासी 62 वर्षीय मरीज नंद लाल मीणा को उनके परिजन ये सोच कर लाए थे कि इनका इलाज अच्छे से हो सकेगा, लेकिन मीणा परिवार के मुताबिक वहाँ के डॉक्टरों ने मीणा का ऐसा इलाज किया कि अब वो इस दुनिया में नहीं रहे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने उन्हें जो बिल चुकाने के लिए कागजात सौंपे हैं उसमें मरीज की मौत के बाद उनके एंजियोग्राफी होने का बिल भी शामिल है। इतना ही नहीं अस्पताल ने बिल चुकाने से पहले उन्हें मृतक की डेड बॉडी के पास तक जाने से भी रोक दिया और आखिरकार परिजनों को पुलिस बुलानी पड़ी। वहीं मृतक की बेटी का कहना है कि जब वो अपने पापा को लेकर अस्पताल पहुँची थी तो उनकी तबियत ज्यादा खराब नहीं थी लेकिन डॉक्टरों ने उनका ठीक से इलाज नहीं किया और उन्हें मौत की नींद सुला दिया। वहीं मात्र चार से पांच घंटों में करीब दो लाख रुपये का बिल भी थमा दिया। इतना ही नहीं डॉक्टरों ने उनसे जो महंगी दवाईयां मंगवाई वो भी मरीज को नहीं दी गई। कुछ दिन पहले भी एक मरीज के परिजन ने एक नर्स पर ही मरीज के हिस्से की दवाईयां चुराकर बेचने का आरोप भी लगाया था। इन सबको देखते हुए अस्पताल की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अस्पतालों की ऐसी मनमानी जारी रहेगी या स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों पर नकेल कसने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा ?

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