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नई दिल्ली -“जम्मू-कश्मीर और मीडिया : जमीनी हकीकत और झूठ ” के विषय पर आयोजित हुई परिचर्चा

जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और भारत विरोधी ताकतें सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रही हैं। इसमें वहां का ज्यादातर स्थानीय मीडिया भी शामिल है। वजह, सरकार की इस तरफ अनदेखी और नेशनल मीडिया की कश्मीर और उसकी हकीकत से दूरी है। ये तथ्य सामने आएं हैं “जम्मू-कश्मीर और मीडिया :जमीनी हकीकत और झूठ ” विषय पर आयोजित एक परिचर्चा में। दिल्ली पत्रकार संघ और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र नयी दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस परिचर्चा में जब जम्मू-कश्मीर पर प्रिंट और टेलीविज़न न्यूज़ चैनल्स तथा सोशल मीडिया पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों ने जब अपने अनुभव सांझा किये तो दिल्ली के पत्रकार भी हैरान थे। विशेषज्ञों ने बड़ी बेबाकी से कश्मीर की उस जमीनी हकीती को सामने रखा जिस पर मुख्यधारा की मीडिया ने अनदेखी ही की है। मुख्य वक्ताओं में जम्मू कश्मीर मामलों के अध्येता आशुतोष भटनागर, जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में प्रिंट और टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों पर पैनी नजर रखने वाली श्रीमती आभा खन्ना और जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया पर गहरी नजर रखने वाली अरविन्द तोमर प्रमुख थे। वक्ताओं और विशेषज्ञों का कहना था कि जम्मू कश्मीर में भारत विरोधी ताकतें और अलगाववादी सोशल मीडिया के जरिये प्रोपेंगेंडा कर रहे है। हैरत की बात है कि जम्मू-कश्मीर के हालात और मीडिया पर न तो मुख्यधारा का मीडिया अपने ब्यूरो और रिपोर्टर की रिपोर्ट की जांच करना जरूरी समझता है और न ही सरकार सोशल मीडिया पर चल रहे देश विरोधी दुष्प्रचार पर संजीदा दिखती है। ऐसे हालात में दिल्ली पत्रकार संघ की इस पहल का स्वागत होना चाहिए। साथ ही समय रहते नेशनल मीडिया को भी कश्मीर मुद्दे और उनके हालात पर निष्पक्षता के साथ रिपोर्टिंग हो यह सुनिश्चित करना चाहिए।

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