गंगाराम अस्पताल में खुला टीबी का डॉट्स सेंटर

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चेयरमैन अशोक चंद्रा ने किया सेंटर का उद्घाटन 

दिल्ली में निजी अस्पताल के साथ पीपीपी मॉडल का पहला सेंटर 

2025 तक देश से टीबी के उन्मूलन का है लक्ष्य 


नई दिल्ली , भारत से टीबी को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 की समय सीमा तय की है।  इसके लिए देश भर में सरकार ने डॉट्स सेंटर खोले हुए हैं। लेकिन अब इसे और आगे बढ़ाते हुए सरकार ने निजी अस्पतालों से भी हाथ मिलाना शुरू कर दिया है।  राजधानी दिल्ली में सर गंगाराम अस्पताल इसकी पहली कड़ी है, जहाँ बुधवार को पीपीपी मॉडल के पहले डॉट्स सेंटर का उद्घाटन किया गया। 

सर गंगाराम ट्रस्ट सोसाइटी के चेयरमैन अशोक चंद्रा ने इसका उद्घाटन करते हुए कहा कि  सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओ के साथ भागीदारी के लिए हमारा अस्पताल हमेशा अग्रणी है। मुझे यकीन है कि यह डॉट्स क्लिनिक 2025 तक टी.बी. को खत्म करने के लिये सरकार के प्रयास में मदद करेगा । इस अवसर पर अस्पताल के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में से एक डॉ डीएस राणा ने कहा किपब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पी.पी.पी.मॉडल) के माध्यम से यह क्लिनिक ‘रिवाइज्ड नेशनल ट्यूबरक्लोसिस कण्ट्रोल प्रोग्राम (RNTCP)’ के साथ सर गंगा राम अस्पताल मेंआने वाले टी.बी. के सभी प्रकार से पीड़ित रोगियों के लिए एक ही छत के नीचे उपचार प्रदान करने में मदद करेगा। उन्होंने बताया।

कि इस पी.पी.पी. मॉडल के तहत, सर गंगा राम अस्पताल बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षित स्टाफ प्रदान करेगा।आर.एन.टी.सी.पी. के तहत मेडिसिन और जांच की नि:शुल्क सेवाएँ प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस डॉट्स क्लिनिक में इलाज करानेवाले सभी रोगियों को सरकार के NIKSHAY POSHAN YOJANA के तहत बेहतर पोषण के लिए सीधे उनके खातों में        रुपये 500/ – प्रतिमाह मिलेंगे।

  इस अवसर पर स्टेट ट्यूबरक्लोसिस ऑफिसर डॉ अश्विनी खन्ना बताते हैं की आरएनटीसीपी के अनुसार यह 2025 तक भारत से टी.बी. को खत्म करने के उद्देश्य से दिल्ली के पहले निजी अस्पताल के साथ एक अनूठा पी.पी.पी. मॉडल का प्रयोग है ।

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