दिल्ली में कैसे होंगी रामलीला ? असमंजस में आयोजक

-दिल्ली दर्पण टीवी

​इस बार अक्टूबर में रामलीलाओं का मंचन होना है। इससे पहले सामान्यत: पहले के सालों में इसकी तैयारी जुलाई माह से ही शुरु हो जाती थी। दिल्ली में अलग—अलग जगहों पर आयोजित होने वाली कमेटियां इसके लिए आयोजक रूपरेखा तैयार करने में जुट जाते थे। स्थानीय कलाकारों के चयन से लेकर सिनेमा और टीवी के चर्चित कलाकरों से अनुबंध, मंच की साज—सज्जा, दूसरे तरह की व्यवस्थाएं से लेकर रामलीला स्थलों पर भूमि पूजन के अनुष्ठान भी संपन्न हो जाते थे। किंतु अगस्त माह के बीत जाने तक इसके आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।

इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी असमंजस में हैं कि क्या इस बार दिल्ली में रामलीलाएं हो पाएंगी? अगर होंगी तो कैसे? क्या कलाकारों को भी मास्क पहनाना पड़ेगा? पहले की तरह ही मैदानों में रामलीलाओं का आयोजन होगा? या फिर किसी धर्मशाला, स्टेडियम, स्टूडियो या अन्य किसी जगह? लीला देखने आने वाले दर्शकों को कैसे संभाल पाएंगे? सोशल डिस्टेंसिंग का क्या होगा? झूले और खाने-पीने के स्टॉल का क्या होगा?

ऐसे तमाम सवाल इन दिनों दिल्ली के रामलीला आयोजकों के जेहन में घूम रहे हैं। इनका जवाब पाने के लिए अधिकतर आयोजकों ने  लालकिले पर 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम का भी इंतजार किया। उन्हें लगा उसके बाद शायद उसके आधार पर   सरकार की तरफ से कोई गाइडलाइन मिल जाए। इसी बारे में श्री रामलीला महासंघ की ओर से 19 जुलाई को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग की गई। इसमें कई लीला आयोजक शामिल हुए। महासंघ के महासचिव अर्जुन कुमार ने कहा कि फिलहाल तो मुश्किल लग रहा है। तब यह भी तय हुआ कि 15 अगस्त के समारोह के बाद फिर स्थितियों को देखते हुए दोबारा मीटिंग कर इस बारे में योजना बनाई जाएगी। हालांकि  श्री धार्मिक लीला के प्रधान- महानंद सिंघल ने कहा कि कोरोना बीमारी में रिस्क तो लिया नहीं जा सकता।

अशोक विहार फेज-2 में होने वाली आदर्श रामलीला के वाइस चेयरमैन सतीश गर्ग का कहना है कि अभी तक हमने अपनी ओर से इंकार नहीं किया है। हालातों पर गौर कर रहे हैं। अगर सुरक्षित तरीके से लीला संभव हुईं तो करेंगे। पीतमपुरा की श्री राम-लखन धार्मिक सभा के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता का कहना है कि शायद इस बार लीला होना संभव नहीं होगा। द्वारका सेक्टर-10 में होने वाली श्री रामलीला सोसायटी के मुख्य संरक्षक राजेश गहलोत का कहना है कि कलाकार तो बुक कर दिए हैं। उन्हें स्क्रिप्ट भी दे दी गई है। अनुमति मिली तो 20 दिन पहले भी सबकुछ तैयार हो जाएगा। नहीं तो, जय सिया राम।

कुल मिलाकर सबकुछ कोरोन केस के घटते मामले और हालात सामान्य होने पर ही इस बारे में सोचा जा सकता है, वरना लीला नहीं होगी। इस बावत रामलीला कमेटियों की अपनी—अपनी बैठकें हुईं और उनकी एक बड़ी बैठक भी संपन्न हो गई। फिर भी कोई ठोस निर्णय नहीं निकल पाया।  लालकिला मैदान में होने वाली लव-कुश रामलीला के प्रधान अशोक अग्रवाल का कहना है कि मैदान में ना सही तालकटोरा स्टेडियम या किसी फार्म हाउस में लीला हो सकती है। सब कुछ सरकार पर निर्भर है। यह भी सुझाव आए कि रामलीलाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से भी दिखाया जा सकता है। कोरोना वॉरियर से भी लीला कराई जा सकती है। आदि—आदि!!

नव श्रीधार्मिक लीला के सचिव प्रकाश बराठी वेट एंड वॉच की पॉलिसी पर चल रहे हैं। यह भी सोचा जा रहा है कि लीला नहीं हुई तो दशहरा ही मना लें। समस्या इसबार चंदा इकट्ठा करने की भी आ सकती है। यह भी कुछ कम बड़ा टास्क नहीं होगा। यमुनापार के सीबीडी ग्राउंड में होने वाली बालाजी रामलीला कमिटी के प्रधान भगवत रूस्तगी के अनुसार ग्राउंड की बुकिंग हो गई है, लेकिन सरकार की नीति के  हिसाब से रामलीलाओं का मंचन संभव हो पाएगा। आईपी एक्सटेंशन की श्री रामलीला कमिटी के प्रधान सुरेश बिंदल कहते हैं कि अगर लीलाएं होती हैं तो ना झूलें लगेंगे और ना खाने-पीने के स्टॉल।

मुगल काल से रामलीलाओं की हुई शुरुआत

दिल्ली में रामलीलाओं का जिक्र हो और रामलीला ग्राउंड को याद न किया जाए। ऐसा नहीं हो सकता। रामलीलाओं का इतिहास ही रामलीला ग्राउंड की रामलीला से शुरू हुआ था। यह रामलीला मुगलों के जमाने से ही चल रही हैं। इस रामलीला को देखने के लिए मुगल शासकों के साथ साथ अंग्रेज भी आते थे। कहा यह भी जाता है कि दिल्ली में रामलीला की शुरूआत कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर से हुई थी। कनॉट प्लेस में रामलीला की शुरूआत अकबर के शासनकाल में तुलसीदास जी ने कराई थी।

दिल्ली में रामलीला की शुरूआत कनॉट प्लेस से हुई थी। बाद में इस रामलीला को औरंगजेब ने बंद करवा दिया था। इसके बाद दोबारा रामलीला मुहम्मद शाह रंगीला के समय में शुरू की गई। कहा जाता है कि एक बार दिल्ली के शासक मुहम्मद शाह रंगीला का खजाना किसी लड़ाई में खाली हो गया। उस समय मंत्रियों ने कहा कि आप सेठ सीता राम, सेठ घासीराम और लाला पातीराम तीनों भाईयों को बुलाकर धन की मांग करो।

रंगीला ने मंत्रियों के कहने पर तीनों भाइयों को बुलवाया और धन की मांग की। लाला सीता राम ने रंगीला से कहा कि आपको किस सन के कितने सिक्के चाहिएं। इसके बाद लाला सीताराम ने रंगीला की बात मानते हुए दरबार में धन के ढेर लगा दिए। आखिर में रंगीला को ही कहना पड़ा बहुत हो गया।

इसके बाद रंगीला ने सेठ सीताराम से कहा कि मांगों क्या मांगते हो। इस पर सेठ सीताराम ने उनसे रामलीला करने की इजाजत मांगी। मंत्रियों के मना करने के बावजूद रंगीला ने सेठ सीताराम को उनकी हवेली में रामलीला करने की इजाजत दे दी। पुरानी दिल्ली में तभी से रामलीला होती आ रही है।

पहले राम बारात पैदल निकाली जाती थी। कहा जाता है कि एक बार लार्ड हार्डिंग बग्गी में जा रहे थे। लोगों ने कहा कि राम बारात भी बग्गी में निकाली जानी चाहिए। इस पर सेठ छन्ना मल ने अपनी बग्गी राम बारात के लिए दे दी। बाद में सेठ छन्नामल ने उस बग्गी को परमानेंट राम बारात निकालने वालों को दे दिया था। इस बारात की सुरक्षा के लिए करीब 50 अखाड़ों के पहलवान साथ साथ करतब दिखाते हुए चलते थे। देश आजाद होने के बाद ही अखाड़ों का चलना बंद हुआ था। पहले लवकुश रामलीला देखने के लिए लोग कम आते थे। लव कुश रामलीला में भीड़ बढ़ाने के लिए स्व. एच के एल भगत ने पहली बार दूरदर्शन पर उस समय दिखाए जाने वाले सबसे पसंदीदा और चर्चित सीरियल रामायण के कलाकारों को बुलाया था। एक बार की बात है कि हेमा मालिनी को भी रामलीला देखने के लिए लालकिले पर बुलाया गया। इसकी घोषणा दो दिन पहले ही कर दी गई थी। बस फिर क्या था। रामलीला देखने वाले उस दिन रामलीला शुरू होने से दो घंटे पहले ही आकर बैठ गए थे और रामलीला के अंतिम सीन तक बैठे रहे। क्योंकि हेमा मालिनी को रामलीला के अंत में बुलाया गया था। ताकि रामलीला में पूरी भीड़ बनी रहे और राम की लीला घर घर पहुंचे। वैसे, भी जब पश्चिमी सभ्यता हावी हो रही हो। राम का नाम घर घर पहुंचना जरूरी है। इससे परिवारवाद को बढ़ावा मिलता है। असल में कुछ लोग तो आज भी रामलीला को मेले के रूप में देखते हैं। वह रामलीला में अपने परिवार को चाट पकौड़ी खिलाने जरूर लाते हैं। वैसे, भी चांदनी चौक की चाट पकौड़ी के लिए मशहूर है।

आखिरी मुगल सम्राट बहादुर शाह सफर ने भी रामलीला का मंचन करवाया। लेकिन अंग्रेजी हुकुमत ने रामलीला मैदान में होने वाले इस आयोजन को रुकवा दिया और यहां फौज के ठहरने और घोड़ों का अस्तबल बना दिया। 1911 में पंडित मदन मोहन मालवीय ने फिर से रामलीला की शुरुआत की। आज चांदनी चौक के गांधी मैदान, सुभाष मैदान और रामलीला मैदान का रामलीला मशहूर है। दिल्ली की सबसे पुराने रामलीला है परेड ग्राउंड की रामलीला।

कैसी—कैसी मशहूर रामलीलाएं

हिंदू त्योहारों में दशहरा का स्थान अहम है। नवरात्र और दुर्गापूजा को लेकर लोगों की गहरी आस्था बनी हुई है। उसी के साथ रामलीलाओं का मंचन त्योहार की खुशी को दुगना कर देता है। साथ ही लोगों को आपसी भाईचारे, पारिवारिक और सामाजिक प्रेम, सद्भाव की भावना जागृत हो जाती है। दिल्ली के कुछ मशहूर रामलीलाओं को देखने के लिए लोग दूर—दूर से पहुंचते हैं। इन रामलीलाओं में न सिर्फ हजारों की भीड़ उमड़ती, बल्कि बॉलीवुड सितारे भी अभिनय कर कार्यक्रम में चार चांद लगाते हैं। लंका दहन, राम-रावण के युद्ध काफी रोमांचकारी होता है। दिल्‍ली कि कुछ रामलीलाएं देश भर में लोकपिय हैं। 

लाल किले की ‘लवकुश रामलीला’

जब दिल्‍ली की रामलीला का जिक्र आता है तो उसमें सबसे पहले हम लाल किले की ‘लवकुश’ रामलीला का नाम लेते हैं। यह रामलीला इसलिए खास है क्‍योंकि इसमें रामायण के चारित्र निभाने वाले लोग बॉलीवुड और पॉलिटिक्‍स से होते हैं।  दिल्‍ली के लाल किला मैदान में होने वाली ‘लवकुश’ रामलीला करीब चार दशक पुरानी है और इसकी भव्यता की चर्चा कई दृश्यों को आधुनिक तकनीकों के जरिए दिखाने के कारण होती रही है।  इसका अलग-अलग भाषाओं में प्रसारण भी इस बार इस कमेटी में भी सन्नाटा है। लव कुश रामलीला कमेटी का गठन 1979 में किया गया था। 

श्रीराम लीला कमेटी

यह कमेटी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में हर साल विशाल रामलीला का आयोजन कराती है। रामलीला मैदान की रामलीला का आयोजन पिछले 180 सालों से हर साल लगातार किया जा रहा है। कहा जाता है कि इसे मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने शुरू कराया था। इसे दिल्ली का सबसे पुराना और पारंपरिक रामलीला भी कहा जाता है। यहां नवरात्रियों में शुरू होने वाला रामलीला दशहरा के रावण तक चलता है। यहां की रामलीला शाम छह बजे से शुरू होती है जो रात 10-11 बजे तक चलती है।

  श्री धार्मिक लीला कमेटी

दिल्ली की तीसरा सबसे चर्चित और ऐतिहासिक रामलीला लालकिला के पास सुभाष मैदान में आयोजित की जाती है। 1923 से शुरू हुई इस रामलीला में बड़े बडे़ नेताओं को बुलाने के लिए चर्चित है। यहां पर प्रधानमंत्री जैसे बड़े नेता भी आते रहते हैं। यहां की रामलीला मंचन के लिहाज से भी खास होती है। यहां उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बरेली से मशहूर कलाकार बुलाए जाते हैं। यहां पर आपको चांदनी चौक के बने स्वादिष्ट व्यंजनों का भी लुत्फ उठाया जा सकता है। शाम सात बजे से शुरू होने वाली यहां की रामलीला भी 10- 11 बजे तक चलती है। यहां पर दशहरा को विशाल रावण का दहन किया जाता है।

  नव श्री धार्मिक लीला कमेटी

लालकिला में होने वाली रामलीलाओं एक यह भी चर्चित और ऐतिहासिक रामलीला नव श्री धार्मिक लीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला भी एक है। यहां की रामलीला काफी हाईटेक होती है। यहां की रामलीला की खासियत ही आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल है। हर दिन यहां पर लोगों को रामलीला मंचन के दौरान कोई न कोई नई तकनीक से कलाकारी दिखाई जाती है। इस रामलीला के आस पास भी खाने पीने के लिए बहुत सी दुकाने उपलब्ध होती हैं। दशहरा तक चलने वाली यहां की रामलीला भी शाम साढे सात बजे से शुरू होती है।

श्री राम डांस ड्रामा

 दिल्‍ली के श्री राम भारतीय कला केंद्र में एक अलग तरह की रामलीला का आयोजन सात दशकों से किया जाता रहा है। इसे ‘श्री राम’ के नाम से प्रस्‍तुत किया जाता है। इसके इस बार के आयोजन को लेकर भी संशय की स्थति बनी हुई है। यह 3 घंटे की रामलीला एक तरह का डांस ड्रामा होती है। इस डांस ड्रामा में अलग-अलग क्‍लासिकल डांस फॉर्म जैसे छउ, भरतनाट्यम, कथक और डांडिया के साथ प्‍ले किया जाता है। इसमें रामायण के रामचरित मानस के प्रसंगों को को गीतों में ढाल कर अकादमी के कलाकार डांस करके इस नाटक को प्रस्‍तुत करते हैं। इस नाटक को शोभा दीपक सिंह, जो खुद भी नैशनल अवॉर्डी क्‍लासिकल डांसर रह चुकी हैं, वह डायरेक्‍ट करती हैं। यह राम लीला अनोखी इसलिए भी हैं क्‍योंकि यह नवरात्रि के पहले दिन से शुरू हो कर एक महीने तक चलती है। इस रामलीला को राम विवाह, सीता हरण और सीता की अग्नि परीक्षा जैसे रामायण के अध्‍यायों से पिरोया होता है। 

ब्रॉडवे स्‍टाइल ‘संपूर्ण रामायण’

रामलीला का एक नया रुप आर्यन हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा आयोजित संपूर्ण रामायण में भी देखने को मिलता है। दिल्‍ली के नेता जी सुभाष प्‍लेस में होने वाली यह रामायण बेहद खास रही है। 5 दिन चलने वाली यह रामलीला तीन घंटे की होती है और इस रामलीला में भी क्‍लासिकल डांस के द्वारा पूरी रामायण को स्‍टेज पर प्रस्‍तुत किया जाता है। आपको बता दें कि इस रामलीला में फेमस बॉलीवुड एक्‍टर उदित नारायण ने अपने गीत दिए हैं और एक्‍टर मुकेश कुमार ने रामलीला में संवाद दिए हैं। इतना ही नहीं इस रामलीला में नैशनल स्‍कूल ऑफ ड्रामा के 120 कलाकार अपनी प्रस्‍तुती देते हैं और इसमें नैशनल अवॉर्डी पपीहा देसाई नें डांस कोरियोग्राफ किया है।

ये रामलीलाएं अपने अनूठे प्रयोग के लिए भी काफी चर्चित हैं। यहां दर्शकों को हर साल कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है।

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