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विश्व हिंदू परिषद ने विश्व मानवाधिकार दिवस मनाते हुए विश्व समुदाय पर तीखे सवाल खड़े किए

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद ने आज यहां नोर्थ एवेन्यू में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाते हुए विश्व समुदाय के सामने तीखे और कड़े सवाल उठाए हैं। वक्ताओं ने सवाल पूछे कि पाकिस्तान, अपफगानिस्तान, बंग्लादेश से हिंदू खदेड़े जा रहे हैं और उनके मानवाधिकारों का खुल कर हनन हो रहा है तो विश्व की निगाह उन पर नहीं हैं लेकिन संप्रदाय विशेष के साथ छोटी से छोटी घटना होते ही मानवाधिकारों का हल्ला मच उठता है।इस अवसर पर प्रमुख वक्ताओं में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार,, राज्यसभा सदस्य व भारतीय सांस्क्रतिक संबंध के अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सदस्य ज्योतिका कालरा, विश्व हिंदू परिषद के महासचिव,अंतर्राष्ट्रीय समन्वय, प्रशांत हरतालकर थे।

 कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि इस वर्ष को इतिहास में इसलिए भी याद रखा जाएगा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान हिन्दुओं से मुक्त हो रहा है। वहां के हिन्दू, सिख, बौद्ध की आज़ादी नहीं रही। उन्हें छोडकर आना पड़ रहा है लेकिन उनके बारे में कोई बात क्यों नही करता। कश्मीर के पंडितों की चर्चा यह जगत नहीं करता। हिन्दू देवी देवताओं के जैसे भी चित्र बनें, चर्चा नही होती लेकिन दूसरे धर्मों के चित्रों पर गला काट दिया जाता है तो चुप रहता है। जेहाद पर कुछ नहीं बोला जाता, वहां चुप रहा जाता है। अघोषित सेंसरशिप लगी हुई है। हम मानते है भारत धर्म निरपेक्ष है, सबको समान अधिकार है। लेकिन अधिकार अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दोनों को एक जैसे होने चाहिए।मुख्य वक्ता प्रशांत हरतालकर ने कहा कि मानव अधिकार दिवस क्यो मनाया जाना चाहिए। विशेषकर विश्व हिंदू परिषद को।

मानव अधिकारों को लेकर समाज को जागरूक करने का कर्तव्य उसे निभाना चाहिए। मानव अधिकारों के महत्व को बताने और जागरण के लिए आवश्यक है। मानव अधिकार कर्तव्य भावना के साथ आना चाहिए। विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि कुछ ही लोगों के अधिकारों की बात ज्यादा होती है। सर्वे संतु निरामयः हम मानव अधिकारों की बात नहीं दायित्व की बात करते हैं। अधिकारों की बात ज्यादा होने लगी हैं। उन्होंने पाकिस्तान से आए शरणार्थियों का जिक्र किया। उनके साथ सरेआम मानवाधिकारों का उल्लघन हो रहा है। वहां उन्हें पलायन करना पड़ा। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय को खदेड़ा गया तो यहां शरणार्थी बनकर आये और हमने उन्हें सम्मिलित किया। उन्होंने कहा कि समुदाय विशेष के मानव अधिकारों की रक्षा की बात नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मानव अधिकारों का खुलेआम हनन होता है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को उनके मानव अधिकारों की चिंता नही दिखती। वहां हिन्दुओ की भावना से खुला खिलवाड़ अंतराष्ट्रीय समुदाय को दिखता नहीं है। हमारे यहां लोकतंत्र है।

हम एक वर्गए एक समुदायए एक सम्प्रदाय की नहीं समस्त मानव समाज की बात करते हैं।सम्प्रदाय आधारित शासन में मानव अधिकारों का उल्लंघन ज्यादा होता है। इस पर विश्व समुदाय को ध्यान देना होगाए तभी मानव अधिकारों की रक्षा संभव है। 

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सदस्य ज्योतिका कालरा ने कहा कि वह खुद लाहौर से है। वहां जाने का मौका मिला तो पता लगा जो हिन्दू इलाके और मोहल्ले थेए वे गायब हो गए। वहां दाह संस्कार की भी जगह नही है। नतीजा वहां धर्मांतरण हो गया। एक का अधिकार दूसरे का कर्तव्य है। वास्तविक मानव अधिकारों का पालन हो इसके लिए एक निगरानी तंत्र विकसित करना चाहिए। विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि कुछ ही लोगों के अधिकारों की बात ज्यादा होती है। सर्वे संतु निरामयः हम मानव अधिकारों की बात नहीं, दायित्व की बात करते हैं। अधिकारों की बात ज्यादा होने लगी हैं। उन्होंने पाकिस्तान से आए शरणार्थियों का जिक्र किया। उनके साथ सरेआम मानवाधिकारों का उल्लघन हो रहा है। वहां उन्हें पलायन करना पड़ा। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय को खदेड़ा गया तो यहां शरणार्थी बनकर आये और हमने उन्हें सम्मिलित किया। उन्होंने कहा कि समुदाय विशेष के मानव अधिकारों की रक्षा की बात नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान, अफगानिस्तान में मानव अधिकारों का खुलेआम हनन होता है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को उनके मानव अधिकारों की चिंता नही दिखती।

वहां हिन्दुओ की भावना से खुला खिलवाड़ अंतराष्ट्रीय समुदाय को दिखता नहीं है। हमारे यहां लोकतंत्र है। हम एक वर्ग, एक समुदाय, एक सम्प्रदाय की नहीं समस्त मानव समाज की बात करते हैं।सम्प्रदाय आधारित शासन में मानव अधिकारों का उल्लंघन ज्यादा होता है। इस पर विश्व समुदाय को ध्यान देना होगा, तभी मानव अधिकारों की रक्षा संभव है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सदस्य ज्योतिका कालरा ने कहा कि वह खुद लाहौर से है। वहां जाने का मौका मिला तो पता लगा जो हिन्दू इलाके और मोहल्ले थे, वे गायब हो गए। वहां दाह संस्कार की भी जगह नही है। नतीजा वहां धर्मांतरण हो गया। एक का अधिकार दूसरे का कर्तव्य है। वास्तविक मानव अधिकारों का पालन हो इसके लिए एक निगरानी तंत्र विकसित करना चाहिए।कार्यक्रम में शरणार्थी कैम्प में सालों से सेवा कर रही वीएचपी कार्यकर्ता  ज्योति शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। 

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