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पीवीसी कबाड़ कारोबार पर 18 प्रतिशत जीएसटी थोपे जाने से व्यापारी परेशान, लाखों की रोजी-रोटी पर संकट के बादल

ब्यूरो रिपोर्ट

नई दिल्ली। दिल्ली के मुंडका स्थित एशिया की सबसे बड़ी पीवीसी कबाड़ मार्किट के व्यापारियों पर 18 प्रतिशत जीएसटी थोपे पर पर न केवल यहां के व्यापारी बेहद परेशान हैं, बल्कि यहां काम करने वाले लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा है। इस टैक्स से इनके कबाड़ कारोबार पर संकट खड़ा हो गया है।


व्यापारियों का दर्द है कि इस पीवीसी मार्किट से लाखों लोग अपनी रोजी रोटी चलाते हैं लेकिन अब सरकार ने शून्य से इस पर सीधे 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। यह टैक्स उन पर जुल्म है और अव्यावहारिक है। इस टैक्स को तुरंत हटाया जाना चाहिए। व्यापारियों को समझ नहीं आ रहा है कि सरकार ने प्लास्टिक वेस्ट कारोबार पर टैक्स शून्य से सीधे 18 प्रतिशत क्यों कर दिया।

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व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी के नए स्लैब ने इनकी रोजी रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है, जिस कबाड़ पर कभी कोई टैक्स नहीं लगा था, अब उस पर मोदी सरकार ने सीधे 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। इस कबाड़ मार्किट के कारोबारियों को यह टैक्स अव्यावहारिक लग रहा हैं। इन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस जूते के कबाड़ पर भी 18 प्रतिशत टैक्स और शोरूम से नया जूता लेने जाये तब भी 18 प्रतिशत टेक्स क्यों है, इस टैक्स से इनके इस कबाड़ कारोबार पर संकट खड़ा हो गया है।


मुंडका की इस पीवीसी कबाड़ मार्किट में जहाँ तक नजर जाती है प्लास्टिक का कबाड़ ही कबाड़ नजर आता है। यह वह कबाड़ है जो घरों से निकलता है और सडकों पर या कूड़ा घरों में फेंका जाता है। इस कबाड़ को कूड़ा बीनने वाले एकत्रित करते हैं और फिर कबाड़ी को देते है। शहर के कबाड़ी इस कूड़े को मुंडका लाकर बेचते हैं। यहाँ से यह प्लास्टिक वेस्ट अलग-अलग कर रीसाइकलिंग के लिए भेजा जाता है, यानी यह वह चक्र है जो सबसे खतरनाक समझे जाने वाले प्लास्टिक वेस्ट का निस्तारण करता है। शहर को साफ़ करता है, मोदी के स्वच्छ भारत अभियान पर पर्यावरण को बचता है, जिन्हे सब्सिडी देनी चाहिए, उन गरीब कबाड़ियों पर यह टैक्स थोपा जा रहा है।


मालूम हो कि कबाड़ मार्केट में ज्यादातर लोग कम पढ़े लिखे व्यापारी हैं, लेकिन पिछले 50 सालों से ये पीढ़ी दर पीढ़ी इस काम को कर रहे हैं। ऐसा काम जिसे कर पाना सरकार के लिए भी संभव नहीं है। प्लास्टिक वेस्ट निस्तारण के इनके चक्र को विकसित देशों के लोग भी देखने आतें हैं, लेकिन अफ़सोस है कि हमारी सरकार ही इनके काम की कद्र नहीं कर रही है।


यहां के व्यापारियों की प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से अपील हैं कि इन पर यह टैक्स न लगाया जाये। उल्टे उन्हें सब्सिडी दी जानी चाहिए। पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बन चुके प्लास्टिक के निस्तारण का सबसे बेहतर और एकमात्र उपाय यही है कि इसे ज्यादा से ज्यादा रिसाइकल किया जाये। यानी इसे फिर से इस्तेमाल में लाया जाये। देशभर में प्लास्टिक उद्योग और प्लास्टिक कबाड़ से जुड़े करीब तीन करोड़ कारोबारी यही कर रहे है।

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