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दिल्ली एमसीडी चुनाव में कांग्रेस कहां खड़ी है?

ब्यूरो रिपोर्ट

दिल्ली में अगले साल होने वाले एमसीडी चुनावों के लिए राजनीतिक पार्टियों ने पूरी तरह कमर कस ली है। हर दल वादों, दावों और जीत की रणनीतियों में जुटे नजर आने लगे हैं। कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के साथ-साथ मतदातों के बीच जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया गया है।


आज हम एमसीडी चुनावों को लेकर कांग्रेस की बात करेंगे। सालों से एमसीडी की सत्ता से वनवास भोग रही कांग्रेस इस बार खास तैयारी तैयारी में दिख रही है। कांग्रेस वार्ड स्तर पर मेरा बूथ, सबसे मजबूत अभियान चलाया जा रहा है। नॉर्थ दिल्ली के आदर्शनगर जिले के शालीमार बाग विधानसभा के अंतर्गत हैदरपुर से यह अभियान शुरू किया गया। इस दौरान पार्टी ने कई बूथों पर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।

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बैठक में आदर्श नगर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरिकिशन जिंदल द्वारा हैदरपुर ब्लॉक अध्यक्ष विजेंद्र सिंह के साथ बूथ संख्या 80 व 81 में कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की गई।
इसके अलावा वजीरपुर विधानसभा के सावन पार्क और पश्चिम विहार ब्लॉक में ब्लॉक अध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा के साथ मीटिंग की गई।
किसी जमाने में एमसीडी में एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस के के लिए सबसे सवाल यह है कि क्या दिल्ली में भाजपा और आम आदमी पार्टी की मजबूत मौजूदगी में कांग्रेस का कोई अस्तित्व बचा है? क्या कांग्रेस एमसीडी में वापसी कर सकती है?


एमसीडी में मौजूदा भाजपा के भ्रष्ट शासन से मुक्ति के लिए कांग्रेस मतदाताओं को भ्रष्टाचार मुक्त, स्वच्छ, जवाबदेह और कर्मचारियों के हितों के लिए कोई ठोस आश्वासन दे पाएगी! क्या कांग्रेस के पास एमसीडी चुनाव जीतने के लिए कोई ठोस रोडमैप है?
आज दिल्लीवासियों के लिए सबसे बड़ी समस्या सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार है। दिल्ली में भाजपा के रहते अवैध निर्माणों से समूची राजधानी पटी पड़ी है।
अवैध निर्माण में भाजपा के पार्षदों और अफसरों का मजबूत गठजोड़ समय-समय पर उजागर होता रहा है। पार्टी को अपने कुछ पार्षदों को हटाने पर भी मजबूर होना पड़ा है।


भाजपा न तो एमसीडी की स्कूलों को सुधार पाई, न अपने अस्पतालों की व्यवस्था ठीक कर पाई और न सफाई पर ध्यान दे पाई। दिल्ली की सड़कों, गलियों, बाजारों में कूड़े के ढेर लगे रहे।
सफाई कर्मचारियों से लेकर चिकित्सा और शिक्षा कर्मियों तक को वेतन के लाले पड़े रहे। आए दिन कर्मचारी हडताल, धरने, प्रदर्शन करते रहे, पर एमसीडी में भाजपा के नेता आंखें मूंदे स्वयं कमाई में लिप्त रहे। और तो और एमसीडी की संपत्तियों को बेचने की तैयारी भी करते दिखे। एमसीडी में करोड़ों, अरबों के घोटालों के आरोप एमसीडी नेताओं पर लगते रहे।

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दिल्ली भाजपा के नेता काम की बजाय सिर्फ केजरीवाल सरकार की कमियों के आए दिन उलजुलूल बयानबाजी, धरने, प्रदर्शन करते नजर आए।
ऐसे में कांग्रेस की एक विपक्ष की भूमिका की बात करें तो भाजपा की तमाम अव्यवस्थाओं, भ्रष्टाचार, निकम्मेपन और झूठे दिखावे के बीच इस पार्टी के नेता न तो जनता के दुख, दर्द में कहीं खड़े दिखाई दिए, न उनके हित के कामों में जुटे नजर आए। कोरोना काल में कांग्रेस के दिल्ली के लोगों के लिए मददगार के रूप में कोई उल्लेखनीय काम नहीं दिखे।
फिलहाल दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस का एक भी सदस्य नहीं है। न ही लोकसभा में प्रतिनिधित्व है। दिल्ली में कांग्रेस का अपना जनाधार पूरी तरह गायब दिखाई दे रहा है।

ऐसे में एमसीडी के चुनाव सिर पर आते ही कांग्रेस अब जागी है और कार्यकर्ताओं से लेकर मतदाताओं के बची अपनी उपस्थिति जताने के लिए जिलों, ब्लॉकों, बूथों के दौरे कर बैठकों के आयोजन में जुटी है। कांग्रेस के इस तरह के प्रयास मतदाताओं को कितना लुभा पाएंगे, कहना मुश्किल है, लेकिन इतना पक्का है, दिल्ली के मतदाता भाजपा के खिलाफ आक्रोशित नजर आते हैं। आम आदमी पार्टी सरकार के प्रति उनका रवैया फिलहाल नरम और पक्ष में लग रहा है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एमसीडी चुनावों में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबले में कांग्रेस क्या खोती है, क्या पाती है।

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