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राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक क्षेत्र के प्रेरक व्यक्तित्व, मांगे राम गर्ग दिल्ली आज उनकी जयंती मना रही है

नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष स्व. मांगेराम गर्ग की जयंती पर आज भाजपा संगठन और आरएसएस सहित उससे जुड़े संघठनों ने उन्हें शिददत के साथ याद किया गया। नई दिल्ली में दधीचि देहदान समिति द्वारा इस मौके पर दधीचि कथा का आयोजन कर उनकी स्मति को यादगार बना दिया गया। स्व. मांगेराम गर्ग ने दिल्ली में प्रदेश संगठन की मजबूती में अहम भूमिका निभाई। आम जनता की सेवा के लिए वे सदैव हाजिर रहते थे। राजनीति के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक और सांस्कतिक कार्यक्रमों में भी वे हमेशा आगे रहे।
उनके निधन से राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक जगत स्तब्ध रह गया था। उनकी कमी आज भी महसूस की जाती है।

20 जुलाई, 2019 की सुबह ज्योंही उनने निधन की खबर आई, दिल्ली में शोक की लहर फ़ैल गई। देश के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक जगत में संवेदना का ज्वार उमड़ पड़ा। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत कई मुख्यमंत्रियों ने उनके निधन पर ट्वीट कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय गह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई केंद्रीय मंत्रीगण, लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, विजय कुमार मल्होत्रा जैसे वरिष्ठ नेता भी खुद को अंतिम दर्शन से नहीं रोक पाए। चैनलों की सुर्खिया बदल गईं तो अख़बार बाबू जी के निधन की खबरों से भर गए। खास बात यह रही कि आखरी सांस के बाद भी उनका सेवा-भाव जारी रहा। मांगेराम गर्ग ने जाते-जाते अपना पार्श्व देह मेडिकल की पढ़ाई के लिए लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज को दान कर कर गए।
23 नवम्बर, 1936 को हरियाणा के नरवाना तहसील के कुराड़ गांव के नागरमल परिवार में जन्मे स्व, मांगेराम गर्ग का जीवन संघर्ष ईमानदारी और सेवा भाव का एक आदर्श उदाहण है। उन्होंने अपने जीवन में जो नाम और सम्मान कमाया सब अपनी लगन, मेहनत, जुझारूपन और सेवाभाव से कमाया। अपने मामा प्यारेलाल की संगत से स्वयं सेवक बने मांगेराम गर्ग बचपन से ही सेवा भावी थे। ये संस्कार उन्हें प्रारंभ से ही मिले थे। धार्मिक कार्यों में उनकी गहरी रुचि थी। संत विनोबा भावे से प्रेरित मांगेराम गर्ग को वर्धा की गलियों में शौच साफ करने में भी कभी संकोच नहीं हुआ। सेवा और धार्मिक कार्यों के लिए वे सदैव पहली पंक्ति में खड़े नजर आये। वे प्रेम जी गोयल से भी खासे प्रेरित थे।

विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे स्व. अशोक सिंघल की सलाह पर मांगे राम गर्ग ने देश में तीर्थ यात्रियों की सुविधा और तीर्थ स्थलों के विकास के लिए धर्मयात्रा महासंघ की स्थापना की। वीएचपी की इकाई धर्मयात्रा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख अशोक सिंघल के साथ मिलकर देश भर के सनातन तीर्थ स्थलों पर यात्रियों को हो रही परेशानियों को दूर करने के लिए कई साहसिक कदम उठाए। वे हरिद्वार की प्रसिद्ध धर्मशाला निष्काम सेवा ट्रष्ट के संस्थापक महामंत्री रहे। बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सरकारी आर्थिक सहायता और यात्रियों के अभिनन्दन की शुरुआत उनके ही प्रयासों का परिणाम है। यही नहीं, दिल्ली सरकार द्वारा कांवड़ सेवा शिविर लगवाने में भी उनकी विशेष भूमिका थी। वे युवावस्था से ही गौरक्षा आंदोलन से जुड़े थे। इसके अलावा गोवा मुक्ति आंदोलनकर्मियों की सेवा हो, दिल्ली वासियों को हैजा और प्लेग की महामारी से बचाना, कश्मीर और पंजाब विस्थापितों के लिए कार्य करना हो या देश के किसी कोने में आई प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे लोगों की मदद, वे हर जगह मुस्कुराते चेहरे और मजबूत बाजुओं के साथ खड़े मिलते थे।

संघ में रहकर सनातन धर्म और समाज सेवा करते-करते वे कब राजनीति में चले गए, यह उन्हें भी पता नहीं चला। राजनीति में भी वे सेवक ही रहे। मांगे राम गर्ग जब दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बने तो उनके कार्यकाल में ही पहली बार दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने विजय का स्वाद चखा था। तमाम विषम परिस्थितियों में भी 2003 में उन्होंने वज़ीरपुर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की विजयी पताका फहराई। यही नहीं, देश की राजनीति में भाजपा को मजबूत आधार देने वाले पन्ना प्रमुख व्यवस्था का श्रेय भी स्व. मांगे राम गर्ग को ही जाता है। संगठन कला में उनकी महारत इतनी थी कि देश में कहीं भी प्राकृतिक आपदा आती तो संघ और संघठन उन्हें ही याद करता था। महज चंद घंटों में मदद का सामान तैयार कर आपदा स्थल पर भिजवा देने की उनमें ऐसी अद्भुत कला थी कि उड़ीसा में साइक्लोन से आए तबाही के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने खुद उन्हें मदद जुटाने के लिए निर्देशित किया था। जिसे उन्होंने बखूबी पूरा भी किया था। बहुत कम मालूम होगा कि कारगिल के समय मांगेराम गर्ग ने ही सबसे पहले दिल्ली के व्यापारियों से 14 लाख रुपए इकट्ठा कर सरकार को भिजवाया था, जिसके बाद देशभर से मदद के लिए हाथ उठने शुरू हो गए। पार्टी के लिए धन संग्रह करने में वे माहिर थे। बीजेपी की आजीवन सहयोग निधि के वे राष्ट्रीय संयोजक रहे।

वर्तमान में देशभर में बीजेपी के कार्यालय निर्माण की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी। अपने गृह क्षेत्र में दीपचंद बंधु हॉस्पिटल का निर्माण, झुग्गी वालों को उन्हीं की जगह पर फ्लैट देने की योजना भी उन्हीं की सोच का नतीजा है। उनका जीवन आदर्श रहा है। उन्हीं की तरह उनके पांच बेटे और एक बेटी से भरा पूरा परिवार भी उसी राह पर आगे बढ़ रहा है। स्व. मांगे राम गर्ग का समस्त परिवार हर घड़ी हर परिस्थिति में एकजुट तो रहता ही है बल्कि उन्हीं के नक़्शे-कदम पर समाज, धर्म और देश की सेवा में सदैव आतुर और अग्रणीय रहता है। अशोक विहार में तमाम सामाजिक, धार्मिक गतिविधियों के केंद्र में यह परिवार रहता है।

वे दधीचि देहदान से जुड़े थे। उन्होंने देहदान के प्रति जागरूकता अभियान में बढ़ चढ़कर सहयोग ही नहीं किया, बल्कि खुद भी देहदान कर लोगों को प्रेरित किया। अब वे हमारे बीच तो नहीं हैं, लेकिन उनकी सेवा और संघर्ष भाजपा कार्यकर्ताओं के दिलों में हमेशा एक प्रेरणा पुंज के रूप में बने रहेंगे।

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