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एसयूपी पर बैन लगने के बावजूद भी पॉलिथीन पर कोई रूकावट नहीं

प्रियंका आनंद

राजधानी में एकल उपयोग प्लास्टिक (एसयूपी) के उपयोग पर लगे प्रतिबंध को दो दिन हुए है लेकिन अब भी बाज़ारों में इसकी मौजुदगी बरकरार है। कारण साफ सरकार द्रारा सिंगल प्लास्टिक यूज़ पर बैन लगा तो दिया लेकिन लोगों की सुविधा के लिए कोई विकल्प नहीं दिया गया है। नतीजन लोग इसका उपयोग पहले की तरह ही सामान्य रूप से करते नज़र आ रहे है। हालांकि कुछ दुकानदारों ने इसका विकल्प भी खोज निकाला है लेकिन शुल्क अधिक होने के कारण लोगों को प्लास्टिक का इस्तेमाल करना ही एकमात्र उपाय नज़र आ रहा है।

दिल्ली के कमला नगर मार्किट में रोज़ काफी ताताद में लोग शोपिंग करने आते है और शोपिंग के दौरान पोलिथिन लेना उनकी मजबूरी बन जाता है। ऐसे में सरकार द्रारा पॉलिथीन पर बैन लगाने के बावजूद भी लोगों को बैन का उलंघन करना ही पड़ेगा।

करोल बाग मार्किट में एक शिंकेजी बेचने वाले राजेंद्र भदौरिया ने बताया कि वर्तमान समय में इस्तेमाल किए जाने वाले स्ट्रॉ की किमत 50 पैसे की पड़ती है तो वही कागज़ के स्ट्रॉ की किमत 1 रूपये की आने की संभावना है। महंगाई को देखने हुए हम कागज़ के स्ट्रॉ को खरीद नहीं पा रहे तो इसलिए मजबूरन प्लास्टिक के स्ट्रॉ ही ग्रहकों को देना पड़ रहा है। इससे हमारे पुराना माल भी खत्म हो जाएगा और आने वाले समय में प्लास्टिक भी कम इस्तेमाल होगा। दूसरे दुकानदार ने बताया कि लंबे समय से प्लास्टिक के गिलासों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं और ग्रहाकों को भी उन्हीं की आदत है। वैसै तो प्लास्टिक के गिलासों का विकल्प मौजुद है लेकिन उनका दाम अधिक होने के कारण हम उसे खरीद नहीं पा रहे और अगर खरीद भी ले तो ग्राहक उसका अधिक दाम देने को राजी नहीं है। जिसके परिणाम स्वरूप अभी इस्तेमाल करना पड़गा।

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दिल्ली के सरोजनी नगर और डू कैंपस के अधिकतर छात्र शॉपिंग करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। ऐसे में हर बार शोपिंग के साथ मंहगे पॉलिबेग लेना उनके लिए संभव होता। परिणाम स्वरूप प्लास्टिक पॉलिथीन लेना ही एक रास्ता रह जाता है। सरकार ने पॉलिथीन पर बैन लगा तो दिया लेकिन इसका विकल्प देना शायद भूल गई। अब ऐसे में ग्राहकों के लिए ना चाहते हुए भी शोपिंग के साथ पॉलिथीन लेना ही रास्ता रह गया है। साथ ही सरकार के आदेश के बावजुद भी बाज़रों में कुछ खास फर्क नहीं देखने को मिला। कारण साफ है कि जब तक इसका विकल्प नहीं आ जाता लोग पॉलिथीन ही इस्तेमाल करेंगे ताकि उनको किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े। बाज़ारों में भी पॉलिथीन बैन होने पर कोई ज़्यादा फर्क देखने को नहीं मिला और ना ही ज़्यादा दुकानदारों ने ग्राहकों को पॉलिथीन देने से मना किया। अब देखना ये होगा कि सरकार द्रारा बनाए गये ये नियम कितने कामयाब होते हैं और पॉलिथीन पर कितनी रोकथाम लगती है?

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