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बीमारी नहीं है भ्रम है डायबिटीज ! जल्द खत्म होगा साम्राज्य :- डॉ. एस. कुमार  डायबिटीज विशेषज्ञ

डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. एस. कुमार का दावा, उनके 50 डाइट थेरेपी सेंटरों में आने वाले मरीजों में से एक के भी नहीं निकली डायबिटीज

-डायबिटीज मुक्त भारत का चला रहे अभियान, फ़्रांस से मिल चुका है भारत गौरव पुरस्कार 

-देश दुनिया के जाने माने वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता और एप्रोप्रियेट डाइट थेरेपी नागपुर के संस्थापक निदेशक हैं डॉ. एस कुमार

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

क्या डायबिटीज के नाम से देश में लोगों को डराया जा रहा है ? क्या डायबिटीज नाम की कोई बीमारी है ही नहीं  ? क्या लोगों के मन से डायबिटीज नाम का हव्वा निकाला जा सकता है। डाइट थेरेपी के माध्यम से डायबिटीज का इलाज करने वाले देश और दुनिया के जाने माने डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. एस. कुमार का तो दावा यही कह रहा है। उनका दावा है कि देश के 90 फीसद लोगों में डायबिटीज है ही नहीं। बस लोगों शुगर लेवल बढ़ने को डायबिटीज मान लिया जा जाता है। नियमित दिनचर्या और उचित खानपान और लाइफस्टाइल सही करने से शुगर लेवल को सही किया जा सकता है। डायबिटीज में एलोपैथिक दवाओं के सेवन को वह घातक नुकसानदायक बताते हैं। इन दवाओं से उन्होंने मरीज के अंगों को नुकसान होने का अंदेशा जताया है। 

उन्होंने दावा किया है कि वह देश में 50 डाइट थेरेपी सेंटर चला रहे हैं पर उन्हें तो आज तक एक भी मरीज डायबिटीज का नहीं मिला। आदमी का शुगर लेवल घटता बढ़ता रहता है। उनका दावा है कि  वह न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया से डायबिटीज का हव्वा निकलना चाहते हैं। डॉ. एस. कुमार एक वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता एवं एप्रोप्रियेट डाइट थेरेपी नागपुर के संस्थापक निदेशक हैं। डायबिटीज को खत्म करने के लिए भारत में काम करने पर उन्हें फ़्रांस से भारत गौरव पुरस्कार मिल चुका है। 

डॉ. एस. कुमार का दावा है कि देश में 90 फीसद लोगों को डायबिटीज नहीं है। डायबिटीज पर गहरा अध्ययन करने वाले डॉ. एस कुमार ने कहा है कि देश में जो डायबिटीज का हव्वा है यह सब एलोपैथिक है।  शुगर अनियमित और गलत खानपान से उपजा हुआ रोग है, जिसके लिए इंजेक्शन के रूप में इंसुलिन लेना गलत है। उनका दावा है कि डाइट थेरेपी के माध्यम से डायबिटीज का इलाज रामबाण सिद्ध हो रहा है। डायबिटीज के 3 टेस्ट होते हैं और इस बीमारी को जानने  के लिए टेस्ट पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब देश से टीबी, पोलियो, टाइफाइड और मलेरिया का हव्वा नहीं रहा तो डायबिटीज का भी नहीं रहेगा। वह भारत को डायबिटीज मुक्त करके ही रहेंगे। 

दरअसल देश में एक बड़ा भय यह बैठाया जा रहा है कि भारत दुनिया में डायबिटीज की राजधानी बन रहा है। डॉ. एस कुमार का कहना है कि आधुनिक तकनीक बढ़ने से  डॉक्टर अस्पताल की संख्या भी बढ़ी है। फिर भी डायबिटीज कंट्रोल नहीं हो रही है। उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि जैसे टोल टैक्स देने के समय ट्रैफिक जाम हो जाता है और टोल देते ही यह जाम ख़त्म हो जाता है। ऐसे ही हमारी कोशिकाओं के बाहर शुगर का ट्रैफिक लग जाता है और डाइट थेरेपी से इस ट्रैफिक को हटाते ही शुगर सामान्य हो जाती है। आदमी ठीक हो जाता है। उन्होंने कहा कि डायबिटीज मरीज को जो तीन टेस्ट कराने के लिए बोले जाते हैं। उनके लिए बहुत कम लैबोरेट्री हैं। 

डॉ. एस. कुमार का दावा है कि किसी को कितने भी साल की डायबिटीज हो डाइट थेरेपी से एक से डेढ़ साल में जड़ से खत्म हो जाती है।  मरीज डायबिटीज को अलविदा कह देता है। उन्होंने कहा है कि वह प्रमाणिकता के साथ दावा करते हैं कि भारत में डायबिटीज है ही नहीं। 

उधर डाइट थेरेपी की डॉयरेक्टर भाग्यश्री का कहना है कि डाइट थेरेपी मरीजों का अविस्मरणीय अनुभव रहा है कि वे 25 साल से इंसुलिन के इंजेक्शन ले रहे थे और उन्हें पता चला कि उन्हें डायबिटीज है ही नहीं। उन्होंने दावा किया है कि डायबिटीज का इलाज औषधालय नहीं बल्कि भोजनालय में है। इस चक्रव्यूह से निकलने का रास्ता आदमी के खुद के ही पास है।

दरअसल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में बदलती लाइफ स्टाइल में मधुमेह एक बड़ी समस्या बन गई है। तेजी से बदलती जीवनशैली, तनाव और डिप्रेशन ने शुगर जैसी बीमारियों को जन्म दिया है। आज के लाइफ स्टाइल के चलते शुगर सिर्फ बड़ों को नहीं बल्कि बच्चों को भी चपेट में ले रही है। डॉ. एस कुमार का दावा है कि यदि लाइफ स्टाइल ऑफ़ खान पान सुधार लिया जाये तो शुगर को दूर भगाया जा सकता है। 

दरअसल हमारे शरीर में अग्नाश्य में इंसुलिन का स्राव कम हो जाने के कारण खून में ग्लूकोज स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है तो उस स्थिति को डायबिटीज कहा जाता है। इन्सुलिन एक हॉर्मोन है जो पाचन ग्रंथि द्वारा बनता है और जिसकी ज़रूरत भोजन को एनर्जी बदलने में होती है। इस हार्मोन के बिना हमारा शरीर शुगर की मात्रा को कंट्रोल नहीं कर पाता है। इस स्थिति में हमारे शरीर को भोजन से ऊर्जा लेने में काफी कठिनाई होती है। जब ग्लूकोज का बढ़ा हुआ लेवल हमारे रक्त में लगातार बना रहता है तो यह शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, जिससे आंखें, मस्तिष्क, हृदय, धमनिया और गुर्दे प्रमुख हैं। 

अक्सर देखा जाता है कि लोगों को यह कहकर भी डराया जाता है कि तुम्हारे माता पिता को डायबिटीज है तो तुम्हें भी होगी। ऐसा कुछ नहीं है। दरअसल जंक फ़ूड या फ़ास्ट फ़ूड खाने वाले लोगों में डायबिटीज होने की ज्यादा आशंका रहती है। इस तरह के खाने में वसा ज्यादा पाया जाता है, जिससे शरीर में शुगर लेवल में बढ़ोतरी होती है। अधिक शारीरिक श्रम न करना, मतलब पसीना न बहाना, मानसिक तनाव और डिप्रेशन, ज्यादा दवाइयों का सेवन, ज्यादा चाय, दूध, कोल्ड ड्रिंक्स और मीठे के सेवन,धूम्रपान और तम्बाकू के सेवन से शुगर बढ़ जाती है। ऐसे में डॉ. एस कुमार की डाइट थेरेपी शुगर के मरीजों के लिए कारगर साबित हो रही है। 

डॉ. एस. कुमार भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के जाने माने डायबिटीज विशेषज्ञ हैं। उनकी डाइट थेरेपी से हुए इलाज से देश विदेश के लाखों शुगर मरीज स्वास्थ्य लाभ ले चुके हैं। डॉ. एस. कुमार ने डाइट थेरेपी से डायबिटीज 2008 से शुरू किया था और अब तक निरंतर जारी है। डायबिटीज से मुक्ति के लिए देश में उनके उल्लेखनीय प्रयासों को सराहना मिलती रही है। ये भारत ही नहीं बल्कि समूची दुनिया को शुगर मुक्त देखना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने पहल अपने देश भारत से ही की है। वह देश में शुगर मुक्त भारत अभियान चला रहे हैं। देश के अनेक शहरों में उनके द्वारा संचालित डाइट थेरेपी सेंटर हैं जो शुगर के मरीजों के लिए संजीवनी सिद्ध हो रहे हैं। 

हाल ही में डॉ. कुमार को स्वास्थ्य के क्षेत्र में अप्रितम योगदान के लिए फ़्रांस में भारत गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 422 मिलियन लोग शुगर के शिकार हैं और भारत में इनकी संख्या करोड़ो है के प्रश्न पर डॉ. एस का कहना है कि शुगर को लेकर 90 फीसद लोगों में भ्रम की स्थिति है उन्हें सही से जानकारी न होने की वजह से वह भ्रम में पड़ जाते हैं। उनका दावा है कि एलोपैथिक दवाओं के बजाय डाइट थेरेपी शुगर मरीजों के लिए सबसे अधिक कारगर साबित हो रही है। एलोपैथिक दवाओं को उन्होंने नुकसानदायक बताया है। उनके अनुसार ये दवाएं मरीजों के दूसरे अंगों को घातक नुकसान पहुंचाती है। 

शुगर से बचने के लिए डॉ. एस कुमार ने कहा है कि चाहे बड़े हों, बूढ़े हों, बच्चे हों या फिर जवान सभी को शारीरिक मेहनत करनी चाहिए। वह चाहे व्यायाम हो या अन्य कोई भी शारीरिक परिश्रम। उन्होंने दिनचर्या को व्यवस्थित रखने की सलाह दी है। वह फ़ास्ट फ़ूड से बचने के लिए कहते हैं। खानपान में संयम की बात करते हैं। डायबिटीज को खत्म करने के लिए उन्होंने डाइट थेरेपी को ही सबसे बेहतरीन इलाज बताया है। 

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