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MCD Election : करिश्मा कर सकता है जेजे कॉलोनी और संगम पार्क का रुझान, दिल्ली में लौट रहा कांग्रेस का परंपरागत वोटबैंक 

बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों के भावनात्मक मुद्दों में उलझाने से लोगों को आने लगी है कांग्रेस शासन की याद

सीएस राजपूत 
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम चुनाव में मुकाबला भले ही बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच माना जा रहा हो पर जेजे कॉलोनी और संगम पार्क क्षेत्र में जिस तरह से लोग एक सुर में कांग्रेस की पैरवी कर रहे हैं इससे तो यही लग रहा है कि दिल्ली में कांग्रेस का परम्परागत वोटबैंक लौट रहा है। दरअसल दिल्ली दर्पण टीवी की टीम ने जब एमसीडी चुनाव का जायजा लेने के लिए वजीरपुर की जेजे कॉलोनी और संगम पार्क इलाके में लोगों से बात की तो 85 फीसद लोग कांग्रेस का शासन सही बताने में लग गए। ये लोग न केवल बीजेपी बल्कि आम आदमी पार्टी को भी नकार रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि कांग्रेस के शासन में महंगाई पर तो अंकुश लगा हुआ ही था साथ ही रोजी और रोटी की कोई खास समस्या नहीं थी। 

तो क्या जेजे कॉलोनी और संगम पार्क क्षेत्र की तरह दूसरे वार्डों में भी कांग्रेस का परंपरागत वोटबैंक कांग्रेस के पक्ष में आने लगा है। तो क्या कांग्रेस इन एमसीडी चुनाव में कोई करिश्मा करने  जा रही है ? तो क्या आम आदमी के पास गया कांग्रेस का वोटबैंक फिर से कांग्रेस के पास लौट रहा है। 
दरअसल वजीरपुर की जेजे कॉलोनी और संगम पार्क दिल्ली का वह क्षेत्र है जिसके लोग कांग्रेस का मजबूत वोट बैंक माना जाता था। ये इलाके कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ हुआ करते थे। 2011 में हुए अन्ना आंदोलन के बाद अरविन्द केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाकर कांग्रेस के वोटबैंक को कब्ज़ा लिया था। कांग्रेस का वोटबैंक आम आदमी पार्टी के पास जाने का बड़ा कारण राजनीतिक पंडित कांग्रेस का आम आदमी पार्टी को समर्थन देना मानते हैं। 

दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली दपर्ण टीवी की टीम ने वज़ीर पुर वार्ड 66  की जे जे कॉलोनी में करीब 100 लोगों से बात की तो लगभग 85 लोगों ने कांग्रेस को जिताने की बात कही। इन लोगों का आम आदमी पार्टी से तो मोह भांग हो ही गया है साथ ही ये लोग बीजेपी को भी नकार रहे हैं। 

दरअसल परिसीमन से पहले निमड़ी वार्ड की यही कॉलोनी चुनाव में हारजीत का फैसला करती थी। परिसीमन के बाद इस वार्ड से कुछ और इलाके जुड़े हैं तो  कुछ वार्ड का नाम वज़ीरपुर में जुड़ गया है।  

तो क्या जेजे कॉलोनी और संगम पार्क क्षेत्र की तरह दूसरे इलाकों में भी कांग्रेस का परंपरागत वोटबैंक कांग्रेस में लौट रहा है। तो क्या कांग्रेस कोई करिश्मा करने जा रही है। यह स्थिति तो तब है जब कांग्रेस का प्रचार बहुत कम नजर आ रहा है। जिस तरह से कल दिल्ली कांग्रेस के नेता एमसीडी चुनाव  में दम लगाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले हैं  और उन्होंने चुनाव में दिलचस्पी दिखाई है उससे यह तो लगने लगा है कि अब कांग्रेस का चुनाव प्रचार भी जोर पकड़ने वाला है। मतलब कांग्रेस के चुनाव प्रचार में तेजी आने पर जेजे कॉलोनी और संगम पार्क के साथ ही दूसरे इलाकों में भी कांग्रेस के परंपरागत वोटबैंक के कांग्रेस में लौटने के आसार प्रबल हो जाएंगे।

राजनीतिक पंडित इस क्षेत्र से कांग्रेस के पक्ष में बन रहे माहौल का असर पूरी डिल्ली में होने की बात करने लगे हैं। कुछ लोग भले ही कांग्रेस के परंपरागत वोटबैंक के कांग्रेस में लौटने के संकेत को बीजेपी के लिए शुभ संकेत मान रहे हों पर देखने की बात यह है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस का यह बोटबैंक इन्हीं परिस्थितियों में कब्जाया था तो ऐसे ही कांग्रेस भी इस बोटबैंक को फिर से अपने पक्ष में कर सकती है। मतलब जैसे आम आदमी पार्टी दिल्ली में विकल्प बनी थी ऐसे ही कांग्रेस भी बीजेपी और आम आदमी पार्टी के लड़ाई में दिल्ली में विकल्प बन सकती है। 

वैसे भी शीला दीक्षित के मुख्यमंत्रित्व काल को दिल्ली आज भी याद करते हैं। दिल्ली के फ्लाईओवर और मेट्रो शिला दीक्षित की देन है। यह भी कहा जा सकता है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत यात्रा का असर दिल्ली एमसीडी चुनाव पर भी पड़ रहा है। वैसे भी राहुल गांधी जिस तरह से भारत यात्रा में मेहनत कर रहे हैं। मोदी सरकार की खामियों को जनता के बीच ले रहे हैं उससे लोग कांग्रेस राज को आम आदमी के राज से तुलना करने लगे हैं। 

देखने की बात यह है कि भले ही चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में केजरीवाल सरकार ने काम किया हो पर आम आदमी पार्टी भी बीजेपी की ही तरह भावनात्मक मुद्दों को लेकर राजनीति कर रही है। भावनात्मक मुद्दों की राजनीति जनहित में नहीं मानी जाती है। सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया प्रकरण ने भी आम आदमी पार्टी की छवि धूमिल की है। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद लगातार बेरोजगारी और महंगाई बढ़ी है। वैसे भी बीजेपी का जोर बस हिन्दू मुस्लिम मुद्दे पर ही होता है। इन सबके चलते लोगों की रोजी और रोटी सबसे अधिक प्रभावित हुई है। यह भी बड़ी वजह हो सकती है कि लोगों को कांग्रेस की याद आने लगी है। 

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