-राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण टीवी
दिल्ली | दिल्ली में 27 साल बाद प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद अब बीजेपी में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा इसे लेकर अटकलों का बाजार तेज़ हो गया है। अभी तक मीडिया और प्रमुख नेताओं ,सियासी पंडितों के बीच बेशक 5 -7 नाम चर्चाओं में है , लेकिन जैसा कि बीजेपी हर बार चौकाने वाला नाम लेकर आती है, ऐसे में चर्चाएं है कि क्या दिल्ली में भी ऐसा ही होगा ? क्या पीएम मोदी मध्य प्रदेश , उत्तराखंड , हरियाणा और राजस्थान की तरह क्या दिल्ली में भी राजनीतिक पंडितों को चौंकाने वाला नाम देंगे ? ऐसा नाम जो न केवल सनातन का झंडा लहराएगा बल्कि दिल्ली का योगी भी कहलायेगा,और दिल्ली में सनातन का परचम लहराकर “आप ” को भी ठिकाने लगाएगा। इस शख्स का नाम है दिल्ली बीजेपी मंदिर प्रकोष्ठ के संयोजक खुद को सनातन का सेवक कहने वाले , शकूरबस्ती “आप ” के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को हारने वाले भगवाधारी विधायक करनैल सिंह।

यूँ तो दिल्ली में जिन 5-7 नामों की चर्चा है उनमें पूर्व सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के पुत्र प्रवेश वर्मा , रोहिणी से विधायक नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता , दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा , मनजिंदर सिंह सिरसा , अनिल कुमार शर्मा , पूर्वांचल का चेहरा और सांसद मनोज तिवारी , महिला कोटे शिखा राय और रेखा गुप्ता , कुछ नाम राजनीतिक फिजा में तेज़ी और ताकत के साथ तैर रहे है। लेकिन हम करनैल सिंह को क्यों प्रबल दावेदार मान रहे है इसके पिछले भी ठोस तथ्य और तर्क है।

दिल्ली के इस नवनिर्वाचित भगवाधारी विधायक को मोदी और अमित शाह सीएम के रूप में पेश कर पोलिटिकल पंडितों को हैरान कर सकतें है। इस नाम ने दिल्ली में कई वर्षों तक लौ प्रोफाइल में रहकर अच्छे स्तर पर काम किया है। नगर निगम से लेकर दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनी तो इसके पीछे करनैल सिंह की पांच साल की मेहनत का भी महत्वपूर्ण योगदान है। दिल्ली बीजेपी मंदिर प्रकोष्ठ के संयोजक करनैल सिंह ने योगी की तरह भगवा धारण ही नहीं किया बल्कि दिल्ली को भी भगवामय किया है।
करनैल सिंह को सीएम बनाकर बीजेपी फिर से उसी तरह सबकों चौका सकती है जैसे मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ , राजस्थान और हरियाणा में 2023 में चौंकाया था। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने चुनाव जीतने के बाद शिवराज सिंह चौहान की जगह मोहन यादव को मुख्यमंत्री बना दिया , इसी तरह छत्तीसगढ़ में रमन सिंह जैसे कई बड़े नामों को साइड कर विष्णुदेव सहाय को सीएम बना दिया –राजस्थान में वसुंधरा राजे सहित चर्चा में चले सभी नामों बिलकुल अलग भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया। इसी तरह हरियाणा में मनोहर लाल खटटर और अनिल विज जैसे प्रमुख दावेदारों को हटाकर नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बना दिया। और दिल्ली में भी ऐसी ही प्रबल संभावनाएं संघ और बीजेपी के शीर्ष नेताओं द्वारा व्यक्त की जा रही है।
दिल्ली के शकूरबस्ती से विधायक बने दिल्ली बीजेपी मंदिर प्रकोष्ठ के संयोजक करनैल सिंह का नाम बेशक दिल्ली के राजनीतिक हलकों और पोलिटिकल पंडितों के आंकल और अटकलों में कहीं नजर नहीं आ रहा है। लेकिन अपने सूत्रों की माने तो मोदी और अमित शाह ने इसकी पटकथा करीब पांच साल पहले ही लिख दी थी। बीजेपी ने देश में पहली बार दिल्ली बीजेपी में ही मंदिर प्रकोष्ठ की स्थापना कर दिल्ली को ही इसकी प्रयोगशाला बनाया। दिल्ली में करीब तीन साल से मंदिर प्रकोष्ठ दिल्ली के मंदिर के पुजारियों के हकों और सुविधाओं की की आवाज बुलंद कर रहा है। करनैल सिंह ने तीन सालों तक दिल्ली के हर वर्ग और समाज के मंदिरों में जा जाकर ब्राह्मणों और पुजारियों को प्रकोष्ठ से जोड़ा। दिल्ली में हर मंगलवार हनुमान चालीसा का आह्वान किया तो इसका असर दिल्ली के मंदिरों में देखने को मिला। दिल्ली में ब्रहमणों और पुजारियों का एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर अपनी ताकत का अहसास कराया।
दिल्ली में मंदिर प्रकोष्ठ को इतना संगठित और शसक्त किया कि वह दिल्ली बीजेपी से भी ज्यादा शक्तिशाली हो गया। करनैल सिंह एक बड़े कारोबारी है। दिल्ली के सबसे अमीर विधायक भी है ,बावजूद इसके उन्होंने अपना जीवन सनातन के सरोकारों को समर्पित कर दिया। उन्होंने दिल्ली में भगवा ध्वज को एक ताकत दी। अक्सर हर सभा में खुलकर कहा कि दिल्ली में सनातनी सरकार होगी। यही वजह रही कि करनैल सिंह ब्राह्मण ना होते हुए भी ब्रहमणों और पुजारियों के बीच लोकप्रिय हो गए। करनैल सिंह की यह लोकप्रियता दिल्ली बीजेपी के बड़े नेताओं के आँखों में भी खटकने लगी। वे हर वक्त उन्हें अपना प्रतिद्वंद्वी मानने लगे। दिल्ली बीजेपी का यही स्वभाव दिल्ली में बीजेपी को 27 साल से सत्ता में आने से रोक रहा था। यही वजह है कि जब करनैल सिंह का नाम दिल्ली के शकूर बस्ती विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए चर्चा में आया, तो दिल्ली बीजेपी के बड़े नेताओं से लेकर स्थानीय नेताओं तक ने इसका विरोध किया। विरोध ऐसा कि उनका नाम तक चयन समिति के लिए नहीं भेजा गया। लेकिन शीर्ष नेर्तत्व के दखल के बाद करनैल सिंह को ही टिकट मिली और उन्होंने दिल्ली के कदावर नेता, आप पूर्व के पूर्व मंत्री सतेंद्र जैन को 21 हज़ार वोटों के अंतराल से हरा भी दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामाजिक समीकरण भी साधना चाहतें है , करनैल सिंह ने दिल्ली के सभी समाज के मंदिरों और उनके पुजारियों को जोड़ा है , उनसे वादा किया है कि दिल्ली में सनातनी सरकार बनते ही पुजारियों का वेतन विधानसभा में पास करना प्रमुख प्राथमिकता में होगा। अब जब दिल्ली में प्रचंड बहुमत से सरकार बन गयी है तो यह वादा भी करनैल सिंह को पूरा करना पडेगा। दिल्ली से पुजारियों को वेतन और मंदिरों को सुविधाएँ देकर देशभर में बीजेपी एक संकेत भी देना चाहती है।
दिल्ली बीजेपी मंदिर प्रकोष्ठ से जुड़े कार्यकर्ता करनैल सिंह को दिल्ली का योगी मान रहे है। और जो संकेत मिल रहे है उसे देख महसूस हो रहा है कि पीएम मोदी और अमित शाह संघ के करीबी व सनातन के इस सेवक को दिल्ली की कमान सौंपकर एक साथ कई निशाने साध सकतें है।
अब देखना दिलचस्प होगा क्या बीजेपी अपने अपने पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए इस बार भी एक चौंकाने वाला नाम सीएम के रूप में सामने लाएगी या फिर जो नाम चर्चा में है उन पर मोहर लगाएगी।