Wednesday, March 11, 2026
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156 करोड़ रुपये का घोटाला… अदालत ने खारिज की कारोबारी विक्की रमांचा की अग्रिम जमानत

दिल्ली। 156 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले के मामले में कारोबारी विक्की रमांचा को दिल्ली की अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामले की गंभीरता और जांच की ज़रूरत को देखते हुए उन्हें फिलहाल किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती। इससे अब उनकी गिरफ्तारी के आसार काफ़ी बढ़ गए हैं।

मामला क्या है

जांच एजेंसियों के अनुसार, विक्की रमांचा पर आरोप है कि उन्होंने निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये जुटाए। यह रकम अलग-अलग कंपनियों और प्रोजेक्ट्स के नाम पर ली गई, लेकिन तय समय पर न तो रिटर्न दिया गया और न ही मूलधन वापस किया गया। इस पूरे मामले में रकम का आकार करीब 156 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि रमांचा की कंपनियों ने रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य बिजनेस वेंचर्स में निवेश के नाम पर कई निवेशकों से धन लिया। शुरुआती समय में कुछ लोगों को रिटर्न देकर विश्वास जीतने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में बड़े पैमाने पर भुगतान बंद कर दिया गया।

जांच एजेंसियों का दावा

अभियोजन पक्ष ने अदालत में बताया कि रमांचा के खिलाफ प्राथमिक स्तर पर पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिनसे यह साबित होता है कि उन्होंने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की। एजेंसियों का यह भी कहना है कि अगर उन्हें अग्रिम जमानत मिलती है, तो वे सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं।

जांच टीम ने यह भी बताया कि आरोपित के कई बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं और धनराशि को देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसफर करने के संकेत मिले हैं। एजेंसियों का मानना है कि इस घोटाले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनके नाम रमांचा से पूछताछ के बाद ही सामने आएंगे।

बचाव पक्ष का तर्क

वहीं, रमांचा के वकीलों का कहना है कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया जा रहा है। उन्होंने अदालत में दलील दी कि यह मामला एक कारोबारी विवाद का है, जिसे आपसी बातचीत और समझौते के जरिए सुलझाया जा सकता था, लेकिन राजनीतिक दबाव और व्यक्तिगत रंजिश के चलते इसे आपराधिक रंग दे दिया गया।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि रमांचा का स्थायी पता और कारोबार दिल्ली में है, इसलिए उनके फरार होने की संभावना नहीं है। उन्होंने कोर्ट से अग्रिम जमानत देने की अपील की, ताकि वे जांच में सहयोग कर सकें।

अदालत का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं और यह मामला आम लोगों के विश्वास से जुड़ा है। अदालत ने माना कि अभी जांच शुरुआती चरण में है और कई अहम सुराग मिलने बाकी हैं। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है। इस आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

आगे की कार्रवाई

अदालत के फैसले के बाद जांच एजेंसियां अब विक्की रमांचा की गिरफ्तारी की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनकी संपत्तियों, बैंक खातों और लेन-देन की गहन जांच जारी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम किन-किन माध्यमों से खर्च की गई और क्या इसे विदेश में भी ट्रांसफर किया गया।

इस मामले में दर्ज एफआईआर के तहत रमांचा पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। अगर दोष साबित हुआ तो उन्हें लंबी सज़ा और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

निवेशकों में नाराज़गी

इस घोटाले के सामने आने के बाद निवेशकों में गहरा आक्रोश है। कई पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवन भर की बचत निवेश की थी, लेकिन अब उन्हें डर है कि पैसा वापस मिलना मुश्किल होगा। पीड़ितों ने सरकार और अदालत से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

यह मामला एक बार फिर निवेश योजनाओं में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की ज़रूरत पर सवाल खड़े करता है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों को ऊंचे मुनाफे के लालच में आने से पहले जोखिम और कानूनी पहलुओं को समझना चाहिए।

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