कभी सोचा है, सुबह उठते ही फोन पर कोई ऐसा मैसेज आ जाए, जिसमें लिखा हो—“5 करोड़ दे दे, वरना मरने के लिए तैयार रह।” यह पढ़कर किसी का भी खून जम जाए। ठीक ऐसा ही हुआ है दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) के पूर्व अध्यक्ष रौनक खत्री के साथ।
रौनक, जो कभी दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस में छात्र राजनीति की भीड़ के बीच नारे लगाते, साथी छात्रों की आवाज़ बनते नजर आते थे—आज अचानक खुद एक डर के साए में हैं।
धमकी जिसने सबको हिला दिया
यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है। यह हकीकत है। रौनक को फोन और मैसेज के जरिए धमकी दी गई—“5 करोड़ रुपये दो, वरना तुम्हारी ज़िंदगी खत्म।” सोचिए, एक युवा नेता, जिसने हमेशा भीड़ के बीच अपनी पहचान बनाई, अचानक खुद को अकेला और असुरक्षित महसूस करने लगे।
यह धमकी सिर्फ पैसों की डिमांड नहीं है, यह उस खतरनाक हकीकत की ओर इशारा करती है जहाँ अपराधी बेखौफ होकर नेताओं, वो भी छात्र नेताओं तक को टारगेट करने लगे हैं।
पुलिस और परिवार की चिंता
धमकी मिलने के बाद रौनक ने तुरंत पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और उनकी सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। साइबर सेल यह पता लगाने में लगी है कि धमकी देने वाले कौन हैं, कहां से हैं और उनका मकसद सिर्फ पैसा है या इसके पीछे कोई और बड़ा खेल छिपा है।
घर पर हालात और भी तनावपूर्ण हैं। रौनक का परिवार डरा हुआ है। माँ-बाप हर आवाज़ पर चौंक जाते हैं। सोचिए, एक माँ के लिए यह कैसा वक्त होगा जब उसे बार-बार ये ख्याल आए कि उसका बेटा खतरे में है।
समर्थकों का गुस्सा और डर
रौनक खत्री के समर्थक भी गुस्से और चिंता में हैं। सोशल मीडिया पर उनके लिए सुरक्षा की मांग की जा रही है। दोस्तों और साथियों का कहना है कि यह हमला सिर्फ रौनक पर नहीं, बल्कि छात्र राजनीति की पूरी दुनिया पर है।
कैंपस, जहाँ कभी लोकतंत्र और बहस की आवाज़ गूंजती थी, अब डर की सरगोशियाँ सुनाई देने लगी हैं।
राजनीति और अपराध का टकराव
यह घटना हमें एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है—क्या राजनीति, खासकर छात्र राजनीति, अब भी सुरक्षित है? दिल्ली विश्वविद्यालय हमेशा से राजनीति की नर्सरी माना जाता है। यहां से निकले कई चेहरे राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे। लेकिन अगर वही जगह अब अपराधियों की धमकियों से दबी हुई दिखे, तो सवाल उठना लाजमी है।
कहीं न कहीं यह घटना बताती है कि अपराध और राजनीति का टकराव अब और गहराता जा रहा है।
आगे क्या?
अब हर किसी की नजर पुलिस की कार्रवाई पर है। क्या धमकी देने वाले पकड़े जाएंगे? क्या रौनक और उनके परिवार को सुकून मिलेगा?
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की सुरक्षा का नहीं है, यह उन सभी युवाओं की सुरक्षा का है, जो राजनीति में कदम रखते हैं और समाज की तस्वीर बदलने का सपना देखते हैं।
इंसानी पहलू
सोचिए, कल तक जो इंसान अपने साथियों के लिए लड़ रहा था, आज उसी को अपने परिवार को आश्वासन देना पड़ रहा है कि “सब ठीक होगा।” यह बहुत भारी बोझ है। राजनीति का मैदान जितना बाहर से रोशन दिखता है, उतना ही भीतर से डर और दबाव से भरा होता है।
निष्कर्ष
DUSU के पूर्व अध्यक्ष रौनक खत्री को मिली 5 करोड़ की धमकी सिर्फ एक खबर नहीं है। यह एक आईना है—जो हमें दिखाता है कि अपराध की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि राजनीति के रास्ते पर चलने वाले युवाओं को न सिर्फ विचारों की लड़ाई लड़नी पड़ती है, बल्कि कभी-कभी अपनी जान की भी।

