गोरखपुर स्थित शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान में बिना टिकट दर्शकों को प्रवेश दिए जाने का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद प्राणी उद्यान प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की जा रही है और शुरुआती कार्रवाई के तहत छह आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को हटाया जा चुका है।
जानकारी के अनुसार, पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब वाहन स्टैंड पर एक दर्शक के पास अधकटी पर्ची पाई गई। जांच में पता चला कि उस पर्ची पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर और मोहर नहीं थी, जिसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी।
CCTV फुटेज में मिले संदिग्ध संकेत
जांच के दौरान चिड़ियाघर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। शुरुआती जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें दर्शकों को बिना वैध टिकट जांच के अंदर प्रवेश करते हुए देखा गया। इससे कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
छह कर्मचारी हटाए गए
प्राणी उद्यान प्रशासन ने लापरवाही और अनियमितता के आरोप में छह आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
मामले की गहराई से जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति टिकट काउंटर, प्रवेश द्वार और स्टैंड पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण कर रही है।
तीन महीने की फुटेज खंगाली जा रही
जांच टीम अब पिछले तीन महीनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को तिथि और समय के अनुसार खंगाल रही है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि अलग-अलग दिनों में 15 से 55 लोगों तक को बिना टिकट प्रवेश दिया गया हो सकता है।
प्राणी उद्यान प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही और राजस्व को कितना नुकसान पहुंचा।