गर्मी की छुट्टियों में यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई जा रही समर स्पेशल ट्रेनें खुद यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही हैं। अधिक किराया देने के बावजूद न तो ट्रेनें समय पर चल रही हैं और न ही यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं मिल पा रही हैं। देरी से संचालन और खराब एसी की शिकायतों ने रेलवे की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल ही में गांधीधाम-भागलपुर स्पेशल ट्रेन निर्धारित समय से करीब चार घंटे की देरी से गोरखपुर पहुंची। ट्रेन में सवार यात्रियों को उम्मीद थी कि वातानुकूलित कोच में राहत मिलेगी, लेकिन कई एसी कोचों में पर्याप्त कूलिंग नहीं मिलने से यात्रियों को गर्मी में सफर करना पड़ा। यात्रियों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया।
लेटलतीफी बनी रोज की समस्या
गोरखपुर होकर चलने वाली कई समर स्पेशल ट्रेनें लगातार घंटों की देरी से संचालित हो रही हैं। नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-गोरखपुर स्पेशल और पुणे-गोरखपुर स्पेशल जैसी ट्रेनों के कई घंटे लेट चलने की सूचना सामने आई है।
ज्यादा किराया, कम सुविधाएं
यात्रियों का कहना है कि समर स्पेशल ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में अधिक है, लेकिन सुविधाओं के मामले में कोई विशेष व्यवस्था नजर नहीं आती। एसी कोचों में खराब कूलिंग, देरी और अन्य समस्याओं के कारण यात्रियों में नाराजगी बढ़ रही है।
स्पेशल ट्रेनों में खाली सीटें
दिलचस्प बात यह है कि जहां नियमित ट्रेनों में टिकट मिलना मुश्किल हो रहा है, वहीं गोरखपुर से चलने वाली कई समर स्पेशल ट्रेनों में सैकड़ों बर्थ खाली पड़ी हैं। विभिन्न रूटों पर एसी और स्लीपर श्रेणी में बड़ी संख्या में सीटें उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों की कम रुचि साफ दिखाई दे रही है।
रेलवे व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
यात्रियों और रेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्पेशल ट्रेनों को समयबद्ध और सुविधाजनक नहीं बनाया गया तो यात्रियों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। ऐसे में रेलवे के लिए सेवा गुणवत्ता सुधारना बड़ी चुनौती बन गया है।
गर्मी के मौसम में यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनें तो चलाई हैं, लेकिन यात्रियों का कहना है कि सिर्फ ट्रेनों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि बेहतर सुविधाएं और समय पर संचालन भी उतना ही जरूरी है।