- राजेंद्र स्वामी, दिल्ली दर्पण
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव कांग्रेस को मजबूत करने के लिए पूरा दम लगा रहे हैं। लेकिन कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और आपसी खींचतान इसे लगातार कमज़ोर कर रही है। इसकी बानगी दिल्ली में ब्लॉक अध्यक्षों के चयन को लेकर भी साफ दिखाई दी।
ऐसा ही एक उदाहरण वज़ीरपुर विधानसभा के ब्लॉक अध्यक्ष चुनाव में सामने आया। सावन पार्क ब्लॉक के अध्यक्ष को लेकर प्रदेश के दो बड़े नेताओं के समर्थक गुटों में जबरदस्त खींचतान चल रही थी। इस वजह से ऐलान काफी समय तक अटका रहा। जब कल घोषणा हुई तो बाज़ी पूर्व विधायक हरिशंकर गुप्ता गुट ने मार ली। यहाँ कांग्रेस प्रत्याशी रही रागिनी नायक अपने ख़ास समर्थक को ब्लॉक अध्यक्ष बनवाना चाहती थीं।
गौरतलब है कि वज़ीरपुर कांग्रेस के ये दोनों ही नेता राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में हरिशंकर गुप्ता ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। इसके बाद टिकट रागिनी नायक को मिला। चुनाव के दौरान ही दोनों में मतभेद साफ नज़र आए। तब से ही दोनों के बीच रस्साकशी का सिलसिला जारी है। इस बार भी हरिशंकर गुप्ता गुट हर तरह से हावी दिखाई दिया।
जैसे ही ब्लॉक अध्यक्ष के नाम की घोषणा हुई, वज़ीरपुर के वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता हरिशंकर गुप्ता के निवास पर पहुँचे। उन्हें पता था कि गुप्ता विदेश में हैं। फिर भी वहाँ एकत्र होकर उन्होंने विपक्षी गुट को संदेश दिया कि गुप्ता उनके लिए कितने अहम हैं।
गुप्ता के निवास से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शालीमार बाग स्थित आदर्श नगर ज़िला अध्यक्ष सिद्धार्थ राव के दफ़्तर पहुँचे। यह साफ हो गया कि प्रदेश कांग्रेस का यह फैसला स्थानीय स्तर पर स्वीकार्य है। सभी ने जमकर सिद्धार्थ राव का स्वागत किया और उनका धन्यवाद व्यक्त किया। सिद्धार्थ ने कार्यकर्ताओं को शालीमार बाग और अशोक विहार वार्ड में होने वाले निगम उपचुनाव के लिए जुट जाने का निर्देश दिया।

उन्होंने यह भी साफ किया कि ब्लॉक अध्यक्ष के लिए बड़ी जोर आजमाइश चल रही थी। पार्टी चाहती थी कि यहाँ एक मज़बूत मुस्लिम चेहरा सामने आए जिसे सब स्वीकार कर सकें। इस कसौटी पर एडवोकेट यामीन खान सबसे उपयुक्त साबित हुए। उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। यामीन खान ने भरोसा दिलाया कि प्रदेश अध्यक्ष, ज़िला अध्यक्ष और पूर्व विधायक हरिशंकर गुप्ता ने जो विश्वास उन पर जताया है, उस पर वे खरे उतरेंगे।
कांग्रेस नेत्री रागिनी नायक का राजनीतिक कद भले बड़ा है, लेकिन उन्हें चुनावी ज़मीन नहीं मिल पा रही। कई जगह चुनाव लड़ने के बाद उनकी नज़रें वज़ीरपुर पर टिक गईं। हरिशंकर गुप्ता द्वारा चुनाव न लड़ने के बाद उन्हें टिकट भी मिल गया। लेकिन राजनीतिक अपरिपक्वता कहें या ज़मीन खोने का डर, विधानसभा चुनाव में वे गुप्ता को साथ लेकर नहीं चलीं।
रागिनी नायक को करिश्माई नेता मानते हुए कई स्थानीय नेता उनके साथ हो गए। उन्होंने भी खुद को वज़ीरपुर कांग्रेस का चेहरा बनाने के लिए खुलकर गुटबाजी शुरू कर दी। कई पोस्टरों से हरिशंकर गुप्ता का चेहरा गायब रहा। इसका जवाब गुप्ता गुट के नेताओं ने अपने तरीके से दिया।
यामीन खान को ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर प्रचार सामग्री और पोस्टरों से रागिनी नायक का चेहरा नदारद है। स्थानीय नेता आपसी चर्चा में भी उन्हें नसीहत देते नज़र आते हैं।
बकौल एक नेता— “रागिनी नायक एक काबिल और कुशल वक्ता हैं। लेकिन उन्हें व्यवहार कुशल होने की ज़रूरत है। कई जगह चुनाव लड़ चुकीं रागिनी नायक के लिए यह अच्छा मौका था। हरिशंकर गुप्ता जैसे सीनियर, समझदार और सहनशील नेता को साथ लेकर वे वज़ीरपुर में पकड़ बना सकती थीं। लेकिन शायद उनकी नज़र भी अगले लोकसभा चुनावों पर है और हरिशंकर गुप्ता की नज़र भी लोकसभा चुनाव पर है।”
बहरहाल, ब्लॉक अध्यक्ष चुनाव के बाद अब सबकी नजर निगम उपचुनाव पर है। दोनों गुट अपने-अपने करीबी और समर्थक को टिकट दिलाने के लिए पूरा दम लगाएंगे। चुनाव कौन जीतेगा यह अलग बात है। लेकिन टिकट दिलाने की दौड़ में जीत किस गुट की होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।।

