दिल्ली में जब पुलिस ने हाल ही में एक 64 साल के बुज़ुर्ग झपटमार को पकड़ा, तो इलाके के लोग सन्न रह गए। सोचिए, जिस उम्र में लोग पूजा-पाठ, आराम और पोते-पोतियों के साथ वक्त गुज़ारते हैं, उस उम्र में एक बुज़ुर्ग झपटमारी करते हुए पकड़ा गया।
कैसे चढ़ा पुलिस के हत्थे?
बीते हफ्तों में पुलिस को लगातार शिकायतें मिल रही थीं – राह चलते लोगों से मोबाइल और पर्स छीने जा रहे हैं। ज्यादातर वारदातें एक ही इलाके में हो रही थीं।
जब सीसीटीवी फुटेज खंगाला गया तो पुलिस के हाथ बड़ा सुराग लगा। फुटेज में एक बुज़ुर्ग शख्स तेज़ी से भागता हुआ दिखा। पहले तो किसी को भरोसा ही नहीं हुआ कि इतनी उम्र का आदमी झपटमार हो सकता है। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को यकीन हो गया कि यह वही शख्स है।
फिर क्या था, मुखबिर की मदद से बुज़ुर्ग पर नज़र रखी गई। एक दिन जब उसने झपटमारी की कोशिश की, पुलिस पहले से ही तैयार थी और उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
असली पहचान
गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान महेंद्र (बदला हुआ नाम) के रूप में हुई, जिसकी उम्र 64 साल है। पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो कहानी सामने आई कि उसने पहले एक छोटी दुकान चलाई थी, लेकिन घाटे में डूबने के बाद सब कुछ बर्बाद हो गया।
महेंद्र ने पुलिस को बताया – “घर चलाना मुश्किल हो गया था। शुरू में सोचा कुछ काम करूँ, लेकिन उम्र की वजह से कहीं नौकरी भी नहीं मिली। मजबूरी में झपटमारी शुरू की। लोग मुझे देखकर शक भी नहीं करते थे।”
पुलिस भी रह गई हैरान
पुलिस अधिकारियों के लिए यह मामला चौंकाने वाला था। आमतौर पर ऐसे अपराधों में नौजवान शामिल होते हैं। लेकिन यहां मामला बिल्कुल उल्टा निकला।
एक अधिकारी ने कहा – “हम भी दंग रह गए। इस उम्र में लोग घर के बड़े बनकर नसीहत देते हैं, लेकिन यहां बुज़ुर्ग खुद अपराध करते हुए पकड़ा गया।”
बरामद सामान और केस
पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के बाद कई चोरी किए गए मोबाइल फोन और पर्स बरामद किए। उसके खिलाफ कई केस दर्ज किए गए हैं और अब उसके पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
इलाके की प्रतिक्रिया
इस खबर ने इलाके के लोगों को हिलाकर रख दिया।
एक बुज़ुर्ग महिला बोलीं – “ये तो समाज के लिए शर्म की बात है। इस उम्र में इंसान को बच्चों के लिए मिसाल बनना चाहिए, लेकिन यहां तो उल्टा हो गया।”
वहीं एक युवक ने कहा – “देखो, नाम और उम्र से भरोसा नहीं करना चाहिए। अपराधी कोई भी हो सकता है।”
कहानी में छिपा सबक
महेंद्र की कहानी हमें ये सोचने पर मजबूर करती है कि अपराध की कोई उम्र नहीं होती। हालात, गरीबी और आदतें इंसान को कहीं भी धकेल सकती हैं।
पुलिस की सतर्कता ने इस बार कई लोगों को लूटने से बचा लिया। लेकिन सवाल ये है कि समाज और व्यवस्था ऐसे लोगों के लिए क्या कर सकती है ताकि वे फिर अपराध की राह पर न जाएँ।

