दिल्ली की गलियों में रहने वाला एक बुजुर्ग, जिसने जिंदगी भर ईमानदारी से काम किया और अपने परिवार के लिए पैसा जोड़ा, कुछ अजनबियों की चालाकी का शिकार हो गया। ठगों ने खुद को सीबीआई और ईडी का अफसर बताया और उन्हें इस तरह डराया कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने जीवन की मेहनत की कमाई—पूरे 23 करोड़ रुपये—खो दिए।
डर की शुरुआत एक फोन कॉल से
यह सब एक साधारण फोन कॉल से शुरू हुआ। कॉल करने वाले ने कहा—“आपका नाम एक गंभीर केस में आया है, आपके नाम से विदेश में पैकेज भेजे गए हैं जिनमें ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग का पैसा मिला है।”
सोचिए, अचानक ऐसा फोन किसी बुजुर्ग को आए तो उनकी हालत कैसी होगी? घबराहट, पसीना और यह डर कि कहीं उन्होंने जाने-अनजाने में कोई गलती तो नहीं कर दी।
वीडियो कॉल पर नकली अफसर
इसके बाद शुरू हुआ अगला खेल। बुजुर्ग को वीडियो कॉल किया गया। सामने बैठे लोग सूट-बूट पहने, सरकारी दफ्तर जैसी पृष्ठभूमि के साथ खुद को सीबीआई और ईडी के अफसर बता रहे थे। उनकी आवाज में सख्ती थी और लहजे में ऐसा दबाव कि बुजुर्ग को सच मानना पड़ा।
उन्होंने कहा—“अगर सहयोग नहीं करेंगे तो तुरंत गिरफ्तार कर लेंगे।”
डिजिटल अरेस्ट में फंस गए बुजुर्ग
ठगों ने बुजुर्ग को लगातार वीडियो कॉल पर बांध दिया। उन्हें कहा गया कि अब वे बाहर नहीं जाएंगे, न ही किसी से बात करेंगे। “यह गुप्त जांच है, अगर किसी को बताया तो बड़ी मुसीबत में फंस जाएंगे।”
बुजुर्ग अकेले रह रहे थे। न डर साझा करने के लिए कोई था, न भरोसे का कंधा। वे धीरे-धीरे इस नकली गिरफ्तारी को सच मान बैठे।
परिवार से भी छुपा लिया सच
डर इतना गहरा था कि उन्होंने अपने परिवार को भी कुछ नहीं बताया। ठगों ने उन्हें यकीन दिला दिया कि उनकी संपत्ति अपराध से जुड़ी है। उन्होंने धमकी दी कि अगर तुरंत पैसे ट्रांसफर नहीं किए तो सारी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी और उन्हें उम्रभर जेल में रहना होगा।
इस भय में फंसे बुजुर्ग ने एक-एक करके करोड़ों रुपये ठगों के बताए खातों में भेज दिए।
23 करोड़ की कमाई पल भर में गई
कई दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा। अंततः जब उनका मन टूट गया और शक हुआ तो उन्होंने परिवार को बताया। परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई—पूरे 23 करोड़ रुपये जा चुके थे।
पुलिस की जांच
जब मामला पुलिस तक पहुंचा तो पता चला कि यह गिरोह बेहद संगठित है और संभवत: विदेश से ऑपरेट करता है। नकली पहचान, वीपीएन और विदेशी कॉलिंग ऐप्स का सहारा लेकर ये लोग आसानी से भोले-भाले लोगों को फंसा लेते हैं।
यह घटना हमें क्या सिखाती है
यह सिर्फ एक खबर नहीं, एक चेतावनी है। सोचिए—अगर हमारे माता-पिता या दादा-दादी को ऐसा फोन आए तो क्या वे भी डर के मारे झुक नहीं जाएंगे?
पुलिस का कहना है:
- कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर जांच नहीं करती।
- कोई अफसर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहेगा।
- ऐसे मामलों में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
- परिवार से हर संदिग्ध कॉल या मैसेज साझा करें।
आखिर में…
यह कहानी सिर्फ उस बुजुर्ग की नहीं, हम सबकी है। डिजिटल जमाने में ठगों के हथियार अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि इंसान का डर और अकेलापन भी हैं। हमें अपने बुजुर्गों को समझाना होगा कि डरने की नहीं, बोलने की जरूरत है। क्योंकि आज एक बुजुर्ग ने अपनी जिंदगी की मेहनत गंवाई, कल यह किसी अपने के साथ भी हो सकता है।

