दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में एक ऐसी घटना हुई है जिसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। एक छात्र, जो हर दिन की तरह स्कूल से घर लौट रहा था, उसकी जिंदगी बस कुछ ही कदमों में खत्म कर दी गई। उसे पीट-पीटकर मार दिया गया—एक मासूम की जिंदगी, उसके सपने और उसकी हँसी, सब कुछ छीन लिया गया।
पुलिस ने मामले में 7 नाबालिग आरोपियों को हिरासत में लिया है। शुरुआती पूछताछ में पता चला कि यह हमला अचानक हुआ, लेकिन हिंसा की बेरहमी और युवकों की संख्या ने इसे दिल दहला देने वाला बना दिया। मृतक छात्र के परिवार का दर्द शब्दों में बयान करना मुश्किल है। उसकी मां कहती हैं, “हमारा बच्चा हमेशा हँसता रहता था। अब घर खाली और सुना-सुना सा लग रहा है। उसकी आवाज, उसका हँसना, सब खत्म हो गया।” पिता चुपचाप अपनी आँखें पोंछते हुए बस यही कहते हैं, “हमारा बच्चा क्यों?”
घटना के दिन छात्र स्कूल से घर लौट रहा था। तभी कुछ ही कदमों के बाद उसे एक समूह ने घेर लिया। लोग चीख रहे थे, कोई मदद के लिए दौड़ा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पड़ोसी बताते हैं कि वे डर और बेचैनी में कुछ कर नहीं पाए। “हम बस देख रहे थे… और सोच रहे थे कि कहीं हमारे बच्चों के साथ भी ऐसा न हो जाए,” एक पड़ोसी कहते हैं।
पुलिस ने घटना स्थल पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। सातों नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है, लेकिन अब भी यह समझना बाकी है कि यह हमला अचानक था या इसके पीछे कोई योजना थी।
विशेषज्ञ कहते हैं कि नाबालिग अपराधियों के मामले में केवल सजा ही पर्याप्त नहीं है। यह समाज की जिम्मेदारी भी है कि बच्चों की मानसिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझे। कई बार छोटे-छोटे विवाद, नजरअंदाजी या सही मार्गदर्शन की कमी उन्हें हिंसक कदमों की ओर धकेल देती है।
इस घटना ने इलाके में गहरा डर और गुस्सा पैदा कर दिया है। माता-पिता अब अपने बच्चों को अकेले बाहर नहीं जाने दे रहे। स्कूलों के आसपास पुलिस की पेट्रोलिंग तेज कर दी गई है। लेकिन इन सबके बीच परिवार की पीड़ा किसी के समझ में नहीं आती। मृतक के करीबी दोस्त कहते हैं, “हम कभी नहीं सोच सकते थे कि ऐसा कुछ होगा। हम रोज उसके साथ हँसते, खेलते थे। अब वह सिर्फ यादें बनकर रह गया है।”
स्थानीय लोग भी सदमे में हैं। कुछ का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि चेतावनी है कि हमारे समाज में युवा हिंसा बढ़ रही है। “अगर हमने अभी नहीं सोचा, तो अगली पीढ़ी और भी असुरक्षित होगी,” एक पड़ोसी कहता है।
यह दर्दनाक हादसा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस या कानून की जिम्मेदारी नहीं है। यह हमारी—समाज, स्कूल और परिवार की—जिम्मेदारी भी है। बच्चों के बीच हिंसा, डर और असुरक्षा को रोकना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
संक्षेप में: मंगोलपुरी में एक मासूम छात्र की बेरहमी से हत्या ने दिल्ली को झकझोर दिया है। 7 नाबालिग आरोपी हिरासत में हैं और जांच जारी है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि पूरे समाज की जागरूकता और संवेदनशीलता से सुनिश्चित की जा सकती है।

