– दिल्ली दर्पण ब्यूरो
दिल्ली में हुए धमाके की जांच अब चार गाड़ियों पर टिकी है। ये वही कारें हैं जिनसे पूरी साजिश का नेटवर्क समझ में आने लगा है। NIA, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और IB ने इन गाड़ियों की डिजिटल ट्रेल पर फोकस कर दिया है। हर मूवमेंट, हर लोकेशन और हर ड्राइवर की पहचान दोबारा खंगाली जा रही है।
इको स्पोर्ट: अमोनियम नाइट्रेट ले जाने का शक

सबसे पहले बात उस लाल रंग की EcoSport की, जो खंदावली गांव में मिली। जांच टीम को शक था कि यही कार धमाके का सामान ले जाती रही थी। बुधवार शाम करीब चार बजे NIA की टीम गाड़ी तक पहुंची। फॉरेंसिक जांच में कार के अंदर अमोनियम नाइट्रेट के निशान मिले। इससे यह लगभग तय हो गया कि धमाके में इस्तेमाल होने वाला सामान कई बार इसी कार से ढोया गया।
टीम ने यह भी पता लगाया कि यह कार मंगलवार रात खंदावली में एक खाली प्लॉट पर पार्क की गई थी। गाड़ी चलाने वाला युवक फ़हीम बताया गया है। उसके बारे में जानकारी मिली कि वह उमर का असिस्टेंट है। फ़हीम की बहन उसी गांव में रहती है, इसलिए कार को वहीं छिपाकर रख दिया गया। एजेंसियों ने खंदावली गांव के दो लोगों को उठाकर पूछताछ शुरू कर दी है। यह साफ है कि EcoSport इस केस की मुख्य कड़ियों में से एक है।
Swift Dzire: AK-47 ने बढ़ाई जांच की रफ्तार
तीसरी गाड़ी Swift Dzire रही, जो जांच टीमों के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुई। इसी कार से AK-47 मिली। हथियार मिलने के बाद एजेंसियां और सतर्क हो गईं। यह कार ज्यादातर एक युवक मुजम्मिल चलाता था। वह रोज सुबह करीब आठ बजे इसे लेकर निकलता था। अब जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि इतनी बड़ी राइफल गाड़ी में किसके कहने पर रखी गई। क्या इसका इस्तेमाल धमाके से पहले या बाद में होना था? या यह किसी दूसरी बड़ी योजना का हिस्सा थी? इन सवालों के जवाब ढूंढे जा रहे हैं।
Brezza: शाहीन के नाम पर खरीदी गई नई कार
चौथी कार Brezza है। यह शाहीन के नाम पर रजिस्टर्ड है। यही कार उस बिल्डिंग के पार्किंग में खड़ी मिली जहाँ से कई आरोपी पकड़े गए। फॉरेंसिक जांच हो चुकी है, लेकिन अभी तक यह पक्का नहीं है कि Brezza को धमाके की साजिश में सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया गया था या नहीं। एजेंसियों को शक है कि हो सकता है यह कार बैकअप के तौर पर रखी गई हो या किसी और चरण में इस्तेमाल होने वाली हो। इसका रोल अभी भी अस्पष्ट है।
चारों कारों की डिजिटल ट्रेल से नए सुराग

अब जांच टीमों का पूरा ध्यान इन चार गाड़ियों की डिजिटल हिस्ट्री पर है। कब, किस दिन, किसने चलाई, कहां पार्क की गई, किस मोबाइल नंबर की लोकेशन इन गाड़ियों के आसपास मिली, किन जगहों पर इनका मूवमेंट संदिग्ध लगा। इन सब डेटा को एक साथ जोड़कर धमाके की पूरी योजना का नक्शा बनाया जा रहा है। एजेंसियां अब मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा रेकॉर्ड और फोन कॉल डिटेल्स को जोड़कर असली चेहरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
जांच का फोकस क्यों कारों पर अटका?
दिल्ली धमाके की साजिश लंबी और सुव्यवस्थित दिख रही है। चार गाड़ियों का इस्तेमाल यह दिखाता है कि योजना एक-दो लोगों का काम नहीं था। टीमवर्क था। कई लेयरें थीं। एक कार में सामान, दूसरी में हथियार, तीसरी में मूवमेंट और चौथी शायद बैकअप। कारें इसलिए अहम हैं क्योंकि: हर कार अपने ड्राइवर की लोकेशन बताती है, मोबाइल डेटा उनकी गतिविधियों से जुड़ता है, फॉरेंसिक स्टेन बताता है कि किसमें क्या ले जाया गया, पार्किंग लोकेशन बताती है कि कौन किसके संपर्क में था। यही वजह है कि जांच एजेंसियां इन कारों को चार मजबूत सुरागों की तरह देख रही हैं।
नतीजा क्या निकल सकता है?
फिलहाल इन वाहनों की जांच से ही धमाके की असली साजिश उजागर होने की सबसे ज्यादा उम्मीद है। चारों गाड़ियाँ अब जांच का केंद्र बन चुकी हैं। इनसे मिलने वाली जानकारी धमाके की पूरी टाइमलाइन और नेटवर्क को जोड़ देगी।
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