अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज हो गई है। इसी क्रम में एजेंसी ने विश्वविद्यालय के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी को विशेष अदालत में पेश कर 13 दिन की रिमांड हासिल की है। ED का कहना है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जिनकी गहराई से जांच आवश्यक है। रिमांड अवधि के दौरान एजेंसी उनसे धन के लेन-देन, संस्थान की वित्तीय संरचना और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े संभावित लिंक को लेकर पूछताछ करेगी।
ED ने अदालत को बताया कि मामले में मिली प्रारंभिक जानकारी से यह संकेत मिलता है कि विश्वविद्यालय की स्थापना और संचालन के दौरान कई लेन-देन ऐसे हुए हैं, जिनकी वैधता पर सवाल खड़े होते हैं। एजेंसी का दावा है कि इन लेन-देन की जांच करने पर कुछ अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर विस्तृत पूछताछ जरूरी है। हालांकि, एजेंसी ने साफ किया है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना समय से पहले होगा।
दूसरी ओर, जावेद अहमद सिद्दीकी की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी सिद्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि सिद्दीकी जांच में लगातार सहयोग कर रहे हैं और ED द्वारा मांगी जा रही रिमांड की अवधि बहुत लंबी है। इसके बावजूद, अदालत ने एजेंसी की दलीलों को ध्यान में रखते हुए रिमांड मंजूर कर ली, ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

अल फलाह यूनिवर्सिटी बीते कुछ समय से विभिन्न कानूनी विवादों और जांचों के कारण चर्चा में रही है। कई बार विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, संस्थान के प्रबंधन ने हमेशा अपनी कार्यप्रणाली को सही बताते हुए कहा है कि वह सभी सरकारी नियमों का पालन करता है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ED आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ अन्य व्यक्तियों, कर्मचारियों और संबंधित संगठनों से भी पूछताछ कर सकती है। एजेंसी का मानना है कि दस्तावेजों और डिजिटल डेटा से मिली प्रारंभिक जानकारी से कई और लेन-देन की परतें खुल सकती हैं।
अब जब जावेद सिद्दीकी ED की रिमांड पर हैं, तो आने वाले 13 दिन जांच के लिए अहम साबित होने वाले हैं। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विश्वविद्यालय से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वित्तीय अनियमितता का कोई बड़ा नेटवर्क इसमें शामिल है। फिलहाल, एजेंसी की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

