दिल्ली नगर निगम उपचुनाव से ठीक एक दिन पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। वज़ीरपुर के पूर्व विधायक और AAP के प्रवक्ता रहे राजेश गुप्ता शुक्रवार को भाजपा में शामिल हो गए। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा थी कि वे अशोक विहार वार्ड से अपनी पत्नी के लिए टिकट चाहते थे, लेकिन पार्टी ने टिकट उनके वर्षों पुराने प्रतिद्वंद्वी—AAP के पूर्व पार्षद विकास गोयल की पत्नी को दे दिया। दोनों परिवारों के बीच गुटबाज़ी लंबे समय से चली आ रही है, जिसकी वजह से यह निर्णय गुप्ता के लिए स्वीकार करना मुश्किल बताया जा रहा है।

भाजपा में शामिल होने के बाद राजेश गुप्ता ने AAP नेतृत्व पर नाराज़गी व्यक्त की और टिकट वितरण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मैंने पार्टी में लगातार यह कहा कि अशोक विहार में सही उम्मीदवार को उतारा जाए, लेकिन मेरी बात को नज़रअंदाज़ किया गया। परिवार और क्षेत्र के लोगों की इच्छा के बावजूद टिकट किसी ऐसे पक्ष को दिया गया, जिसके साथ वर्षों से गुटबाज़ी चली आ रही है। मुझे लगा कि अब पार्टी में मेरी कोई सुनवाई नहीं रही।” उनका यह बयान उपचुनाव से ठीक पहले राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है।
चुनाव प्रचार समाप्त होने से कुछ घंटे पहले हुए इस घटनाक्रम ने उपचुनाव के समीकरणों में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा इसे अपने लिए फायदा मान रही है, वहीं AAP इसे गुप्ता की निजी महत्वाकांक्षा का परिणाम बता रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या गुप्ता का यह कदम भाजपा को वोटों में लाभ देगा या फिर AAP अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल होगी। उपचुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि यह राजनीतिक पलायन किस पार्टी के लिए कितना कारगर साबित हुआ।
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