कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल में ताप बढ़ा दिया है। इस बार उनका निशाना बने हैं हुमायूं कबीर, जिन पर इमरान मसूद ने बेहद तीखे शब्दों में हमला बोला। मसूद ने आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर “मानसिक रूप से अस्थिर” हैं और “भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम कर रहे हैं।” उनके इस बयान के बाद राज्य की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है।
इमरान मसूद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हुमायूं कबीर के हालिया कदम और बयान इस बात की ओर इशारा करते हैं कि वह किसी बाहरी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं। मसूद ने कहा कि हुमायूं ठीक से विचार नहीं कर पा रहे और राजनीतिक लाभ के लिए विरोधियों के हाथों खेल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कबीर की गतिविधियाँ बीजेपी की रणनीति का हिस्सा लगती हैं, जिसका उद्देश्य विपक्ष को कमजोर दिखाना और भ्रम की स्थिति पैदा करना है।
मसूद ने अपने बयान में यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी वर्षों से संगठन को मजबूत करने और जनता से जुड़ने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन कुछ लोग इसके विपरीत पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। मसूद के मुताबिक, हुमायूं कबीर का हालिया व्यवहार उसी दिशा में जाता है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के अनुशासन के खिलाफ जाकर ऐसे बयान देना या कदम उठाना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है।
इमरान मसूद का यह भी कहना था कि कांग्रेस पार्टी किसी भी तरह के अंदरूनी कलह को बढ़ावा नहीं देती, बल्कि ऐसे लोगों के लिए पार्टी के दरवाज़े बंद किए जाने चाहिए जो लगातार संगठन को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन बार-बार विवाद खड़ा करना सही राजनीति नहीं कहलाती।
हुमायूं कबीर की ओर से अभी तक मसूद के बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में वह इस पर जवाब दे सकते हैं। कबीर पहले भी कई बार पार्टी लाइन से हटकर बयान देते रहे हैं, जिससे पार्टी में असहज स्थिति पैदा होती रही है।
इमरान मसूद के आरोपों ने हालांकि सियासी गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मसूद का यह बयान सिर्फ हुमायूं कबीर पर हमला नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर संदेश देने की कोशिश भी है। विश्लेषकों के मुताबिक मसूद यह दिखाना चाहते हैं कि कांग्रेस किसी भी तरह की बगावती गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी और जो भी नेता विरोधियों के साथ खड़े दिखाई देंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज़ होगी।
कुल मिलाकर, मसूद के बयान ने कांग्रेस के अंदरूनी हालात को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। जहां पार्टी एकजुटता और मजबूती की बात करती है, वहीं समय-समय पर ऐसे आरोप और बयान पार्टी की साख को चुनौती देते हैं। आने वाले समय में इस विवाद का क्या राजनीतिक असर होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन इतना तय है कि मसूद के इस बयान ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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