संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान एक ऐसा पल देखने को मिला, जब आमतौर पर शांत और गंभीर स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्षी सांसदों पर सख्त नाराज़गी जताई।
चर्चा के दौरान विपक्ष की लगातार टोकाटाकी ने उन्हें इतना खीझा दिया कि उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और सदन की मर्यादा को लेकर कड़ी चेतावनी दी।
“ये हिम्मत हो गई है…” — विपक्ष की बात पर भड़के राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह अपने भाषण के दौरान पूरी गंभीरता से वंदे मातरम के महत्व पर बात कर रहे थे, तभी किसी विपक्षी सदस्य ने हस्तक्षेप करते हुए “बैठ जाएं” जैसी टिप्पणी कर दी।
इस पर रक्षा मंत्री ने तीखे स्वर में कहा—
“कौन बैठाने वाला है? कौन बैठाएगा? क्या बात करते हैं… ये हिम्मत हो गई है! अध्यक्ष महोदय, इनको रोकिए।”
उनके इस तेवर से पूरा सदन कुछ क्षणों के लिए सन्न रह गया। आमतौर पर संयमित रहने वाले राजनाथ सिंह की नाराज़गी साफ दिख रही थी।

“सदन में शोर नहीं, मर्यादा ज़रूरी”
विपक्ष पर फटकार लगाने के बाद राजनाथ सिंह ने तुरंत आसन की ओर मुखातिब होकर कहा कि बहस के दौरान चाहे कोई सहमत हो, असहमत हो, सच बोले या सच से हटकर बोले—लेकिन सदन की मर्यादा कभी नहीं टूटनी चाहिए।
उन्होंने कहा—
“मैंने हमेशा सदन की गरिमा का ध्यान रखा है और कभी नियमों का उल्लंघन नहीं किया। असहमति का जवाब अवसर मिलने पर दिया जा सकता है, लेकिन हंगामा नहीं होना चाहिए।”
“वंदे मातरम् के साथ अन्याय तुष्टीकरण की राजनीति का परिणाम”
राजनाथ सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि वंदे मातरम् के साथ हुआ अन्याय कोई अलग घटना नहीं थी, बल्कि तुष्टीकरण की राजनीति की शुरुआत का संकेत था।
उनके अनुसार, कांग्रेस की इसी राजनीति ने देश के विभाजन तक को जन्म दिया।
उन्होंने कहा—
“आजाद भारत में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों को समान दर्जा देने की बात थी, लेकिन इसे खंडित किया गया। वंदे मातरम् का गौरव लौटाना समय की मांग है और नैतिक जिम्मेदारी भी।”
यह भी पढ़ें: https://delhidarpantv.com/pm-major-rules-seem-like-but-public-problems-should-not-increase/

