दिल्ली के रोहिणी इलाके में शनिवार की शाम जो हुआ, उसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया।
ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे DTC बस ड्राइवर विकास को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया, क्योंकि उसने बारात से रास्ता मांगने के लिए दो बार हॉर्न बजा दिया था।
कुछ ही मिनटों में एक मामूली बात जानलेवा विवाद में बदल गई—और एक परिवार का सहारा उनसे हमेशा के लिए छिन गया।
“बस घर जाना चाहता था…” — लेकिन उसे बस में घुसकर पीट डाला गया
अमन विहार में बारात के कारण सड़क जाम थी। विकास, जो घंटों की duty के बाद थका हुआ घर लौटना चाहता था, ने बस निकालने के लिए धीरे से हॉर्न बजाया।
लेकिन यह बात पास खड़ी एक ऑल्टो कार के महिला-पुरुष को चुभ गई।
बहस बढ़ी… और देखते ही देखते ऑल्टो सवार युवक ने अपने कई लोगों को फोन कर बुला लिया।
वे लोग बस के अंदर घुसे और विकास को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
जिस राहगीर ने उसे बचाने की कोशिश की—उसे भी नहीं बख्शा गया।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने कहा,
“हम विकास को नहीं बचा सके।”
इस एक लाइन ने परिवार की दुनिया उजाड़ दी।

“विकास तो किसी से ऊँची आवाज़ में भी नहीं बोलता था…” — परिजनों का दर्द
विकास के चाचा नरेश कुमार की आंखें नम थीं। उन्होंने कहा—
विकास बहुत शांत स्वभाव का था। किसी से लड़ना-झगड़ना तो दूर, ऊंचे स्वर में बात भी नहीं करता था। वो बस घर जा रहा था… और लोगों ने उसकी जान ले ली।
परिजनों का कहना है कि बस ड्राइवरों पर काम का इतना दबाव रहता है कि वे मजबूरी में तेज़ रफ्तार चलाते हैं, जल्दी-जल्दी मोड़ लेते हैं और हॉर्न बजाते हैं।
लेकिन उनकी सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं।
“हमारे साथी के लिए इंसाफ चाहिए” — सड़क पर उतरे DTC कर्मचारी
विकास की मौत से DTC यूनियन उबल पड़ी है। कर्मचारी कह रहे हैं—
- बसों में पैनिक बटन और कैमरे पब्लिक के लिए हैं
- लेकिन ड्राइवरों और कंडक्टरों की सुरक्षा के लिए शून्य व्यवस्था है
- निजी कंपनियां “ड्यूटी ओके” का इतना दबाव डालती हैं कि ड्राइवर डर के कारण तुरंत रास्ता मांगते हैं
यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी का कहना है—
हर दिन हजारों ड्राइवर खतरे के माहौल में काम करते हैं। लेकिन सरकार हमारी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं करती।
“विकास को शहीद का दर्जा दो”… 1 करोड़ मुआवजे और कड़ी कार्रवाई की मांग
अब परिवार और DTC कर्मचारी एकजुट होकर मांग कर रहे हैं—
- विकास को शहीद का सम्मान दिया जाए
- परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा मिले
- सभी आरोपियों को कठोर सजा मिले
- ड्राइवरों पर बनाए जाने वाला ‘ड्यूटी ओके’ का मानसिक दबाव खत्म हो
फिलहाल पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अभी फरार हैं।
एक हॉर्न… एक जान… और एक परिवार का टूटा हुआ भविष्य
ये घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि दिल्ली की सड़कों पर फैलती असहिष्णुता और ड्राइवरों की असुरक्षा की तरफ बड़ा सवाल खड़ा करती है।
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