Monday, January 26, 2026
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दिल्ली के सैनिक फार्म में DDA की बड़ी कार्रवाई, अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

दिल्ली: सैनिक फार्म में DDA की बड़ी कार्रवाई, अवैध निर्माण पर लगातार चल रहा बुलडोजर – घर मालिक का दावा, “मामला कोर्ट में विचाराधीन”

दिल्ली के सैनिक फार्म इलाके में डीडीए द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई लगातार जारी है। शुक्रवार (12 दिसंबर) की सुबह से डीडीए का बुलडोजर W-22/9 नंबर वाली संपत्ति पर कार्रवाई कर रहा है। डीडीए का कहना है कि यह पूरी जमीन उनकी है और कई बार नोटिस देने के बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके बाद यह कदम उठाना पड़ा।

घर मालिक की पत्नी ने जताया विरोध

जिस मकान पर कार्रवाई की जा रही है, वह ए. एन. शेरवानी का बताया जा रहा है। एबीपी न्यूज से बातचीत में उनकी पत्नी जेहरा शेरवानी ने दावा किया कि मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

उन्होंने आरोप लगाया कि “कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि 18 तारीख तक कोई कार्रवाई न की जाए, लेकिन डीडीए कह रहा है कि उन्हें कोर्ट से कोई आदेश नहीं मिला, इसलिए वे कार्रवाई कर रहे हैं।”

जेहरा शेरवानी के अनुसार, उनके पति ने यह जमीन 1993 में एक किसान से खरीदी थी और 1999 में मकान का निर्माण किया था। तब से अब तक किसी भी विभाग ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। लेकिन हाल ही में डीडीए ने नोटिस भेजा, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

“पहले वन विभाग ने दावा किया, अब डीडीए” – शेरवानी परिवार की परेशानी

घर मालिक की पत्नी का कहना है कि पहले वन विभाग ने पीछे की जमीन पर दावा किया और उसे अपने कब्जे में ले लिया। अब डीडीए यह कहते हुए कार्रवाई कर रहा है कि पूरी जमीन उनकी है।

उन्होंने कहा,
“कहीं और कोई कार्रवाई नहीं हो रही, सिर्फ हमारे घर पर सुबह से बुलडोजर चल रहा है।”

DDA का आधिकारिक पक्ष

डीडीए अधिकारियों के मुताबिक सैनिक फार्म क्षेत्र में अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रहेगा।
डीडीए का कहना है कि—

  • जिस W-22/9 कोठी पर कार्रवाई हो रही है, वह उनकी जमीन पर बनी है।
  • कई नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन निर्माण नहीं हटाया गया।
  • नियमों के तहत कार्रवाई करना जरूरी था, इसलिए बुलडोजर चलाया गया।

निष्कर्ष

सैनिक फार्म में अवैध निर्माणों पर जारी कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एक तरफ डीडीए इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है, जबकि घर मालिक का दावा है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिल रही।

यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

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