Wednesday, February 11, 2026
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हवा बन रही जानलेवा: दिल्ली-NCR में प्रदूषण से इतने फीसदी लोग गंभीर रूप से बीमार

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण अब लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। रविवार को राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 461 तक पहुंच गया, जो इस सर्दी का सबसे प्रदूषित दिन रहा और दिसंबर में दूसरा सबसे खराब स्तर दर्ज किया गया। सोमवार को हालात और बिगड़ते हुए AQI 498 तक जा पहुंचा, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।

धुंध की चादर में लिपटी राजधानी
इन दिनों दिल्ली घनी धुंध की चादर में लिपटी हुई है। ठंडी हवाओं की धीमी रफ्तार और कम तापमान के कारण प्रदूषक जमीन के पास जमा हो रहे हैं, जिससे हवा और ज्यादा जहरीली होती जा रही है। राजधानी के 38 निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि दो केंद्रों पर यह ‘बेहद खराब’ रही। जहांगीरपुरी में AQI 498 दर्ज किया गया, जो सबसे खराब रहा।

28% लोगों ने मानी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं
ऑनलाइन कम्युनिटी प्लेटफॉर्म ‘लोकलसर्कल्स’ के एक हालिया सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे में शामिल दिल्ली-एनसीआर के 28 फीसदी निवासियों ने बताया कि उनके परिवार, दोस्तों, पड़ोसियों या सहकर्मियों में एक या अधिक लोग लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनमें से कई प्रतिभागियों ने कहा कि उनके जानने वालों में कम से कम चार ऐसे लोग हैं, जो प्रदूषण जनित बीमारियों से प्रभावित हैं।

इन बीमारियों का बढ़ा खतरा
सर्वे के मुताबिक, प्रदूषण से प्रभावित लोगों में दमा, क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), फेफड़ों को नुकसान, हृदयाघात, स्ट्रोक और संज्ञानात्मक क्षमताओं में गिरावट जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक जहरीली हवा के संपर्क में रहने से ये जोखिम और बढ़ जाते हैं।

इलाज का खर्च भी चिंता का कारण
प्रदूषण के साथ-साथ बढ़ते चिकित्सा खर्चों ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सर्वे में शामिल 73 फीसदी प्रतिभागियों ने आशंका जताई कि यदि प्रदूषण का स्तर यूं ही बना रहा, तो वे अपने और अपने परिवार की स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले खर्च को वहन नहीं कर पाएंगे।

दिल्ली छोड़ने पर भी विचार
हालात से परेशान 8 फीसदी प्रतिभागियों ने प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर छोड़ने पर विचार करने की बात कही। हालांकि, अधिकांश लोगों ने काम, पारिवारिक जिम्मेदारियों और अन्य मजबूरियों के कारण यहीं रहने की मजबूरी भी बताई।

सरकार से त्वरित कदम उठाने की मांग
इस सर्वे में दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के 34 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। ‘लोकलसर्कल्स’ ने कहा है कि वह इन नतीजों को सरकारी हितधारकों के साथ साझा करेगा और प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाने के साथ-साथ प्रभावित आबादी के लिए स्वास्थ्य सहायता उपायों की मांग करेगा।

बढ़ते प्रदूषण के बीच यह रिपोर्ट एक बार फिर चेतावनी देती है कि यदि ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो दिल्ली-एनसीआर में हवा का यह संकट लोगों की जान पर और भारी पड़ सकता है।

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