New year ईव से ठीक पहले गिग वर्कर्स की प्रस्तावित हड़ताल ने जश्न की तैयारियों पर संकट खड़ा कर दिया है। फूड डिलीवरी, कैब सर्विस, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स से जुड़े लाखों गिग वर्कर्स अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं, जिसका सीधा असर 31 दिसंबर की रात होने वाले समारोहों पर पड़ सकता है।
गिग वर्कर्स का कहना है कि वे लंबे समय से कम भुगतान, अनियमित काम के घंटे, सामाजिक सुरक्षा की कमी और कंपनियों की मनमानी नीतियों से परेशान हैं। new year ईव जैसे व्यस्त मौके पर काम का दबाव कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन उसके अनुपात में उन्हें न तो उचित मेहनताना मिलता है और न ही कोई अतिरिक्त सुरक्षा या बीमा सुविधा दी जाती है। इन्हीं मुद्दों को लेकर देश के कई शहरों में गिग वर्कर्स ने एकजुट होकर हड़ताल की घोषणा की है।
इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर फूड डिलीवरी और कैब सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। new year ईव पर लोग घर बैठे खाना ऑर्डर करना और देर रात सुरक्षित यात्रा के लिए कैब सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। यदि बड़ी संख्या में डिलीवरी पार्टनर और ड्राइवर काम पर नहीं आए, तो रेस्टोरेंट्स, होटल्स और पार्टी आयोजकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई आयोजकों ने पहले ही वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम शुरू कर दिया है।

वहीं, आम लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि अगर कैब और फूड डिलीवरी सेवाएं ठप रहीं, तो वे न्यू ईयर सेलिब्रेशन कैसे मैनेज करेंगे। कुछ लोगों का मानना है कि इस हड़ताल से यह साफ हो जाता है कि गिग इकोनॉमी में काम करने वालों की समस्याएं कितनी गंभीर हैं, जिन्हें अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, कंपनियों का कहना है कि वे गिग वर्कर्स से लगातार संवाद में हैं और स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं। कुछ प्लेटफॉर्म्स ने हड़ताल के दिन इंसेंटिव बढ़ाने और अतिरिक्त बोनस देने की बात भी कही है, ताकि सेवाएं पूरी तरह प्रभावित न हों। हालांकि, गिग वर्कर्स संगठनों का दावा है कि जब तक ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, गिग वर्कर्स की हड़ताल ने new year ईव के जश्न पर अनिश्चितता का साया डाल दिया है। यह स्थिति न सिर्फ एक रात के समारोहों से जुड़ी है, बल्कि गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के अधिकार और भविष्य से भी जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा करती है।

