दिल्ली दर्पण ब्यूरो
तिमारपुर, दिल्ली: कभी-कभी आपदाएँ केवल विनाश लेकर नहीं आतीं, बल्कि वे समाज के सोए हुए संकल्प और आपसी प्रेम को जगाने का माध्यम भी बन जाती हैं। तिमारपुर के बुद्ध बाज़ार रोड स्थित उस प्राचीन मंदिर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहाँ प्रकृति के एक प्रहार ने श्रद्धालुओं के दिलों को तो झकझोरा, लेकिन उनकी आस्था को और अधिक सुदृढ़ कर दिया।
जब आस्था की दीवारें गिरीं, तो फफक पड़े श्रद्धालु
कुछ दिन पहले जब एक विशालकाय पुराना पेड़ अचानक इस प्राचीन मंदिर पर गिरा, तो वह न केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा था जो ढहा, बल्कि हज़ारों श्रद्धालुओं की स्मृतियाँ और भावनाएँ भी मलबे में दब गईं। यह मंदिर दशकों से क्षेत्र की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र था। हादसे के बाद मंदिर की क्षतिग्रस्त स्थिति को देखकर कई बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों की आँखें नम थीं। ऐसा लग रहा था मानो किसी ने उनके घर का ही कोई हिस्सा छीन लिया हो।

संकट में दिखी एकजुटता की अलख
लेकिन शोक की यह घड़ी अधिक लंबी नहीं चली। दुख ने तिमारपुर के निवासियों को बांटने के बजाय एक सूत्र में पिरो दिया। बिना किसी सरकारी मदद का इंतज़ार किए, स्थानीय लोग खुद फावड़े और टोकरियाँ लेकर निकल पड़े। युवा, बुजुर्ग और महिलाएं—सभी ने मिलकर मलबे को साफ किया। इस सामूहिक प्रयास ने यह साबित कर दिया कि जब समाज एक लक्ष्य के लिए खड़ा होता है, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

मकर संक्रांति: नई शुरुआत का पावन संकल्प
आज, 14 जनवरी को जब पूरा देश मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव मना रहा है, तिमारपुर के इस मंदिर प्रांगण में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। विधिवत मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के पुनर्निर्माण का शिलान्यास किया गया।
श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे अपने श्रम और सामर्थ्य से इस मंदिर को पहले से भी भव्य रूप देंगे। वहां उपस्थित एक बुजुर्ग ने भावुक होते हुए कहा, “पेड़ ने मंदिर की छत तोड़ी है, हमारी आस्था नहीं। हम इसे फिर से खड़ा करेंगे, और इस बार यह ईंटों से ज्यादा हमारे आपसी प्रेम से बना होगा।”
एकता की प्रेरणादायक मिसाल
तिमारपुर की यह घटना केवल एक मंदिर के पुनर्निर्माण की कहानी नहीं है; यह कहानी है उस अजेय मानवीय भावना की, जो आपदा को अवसर में बदलना जानती है। आज बुद्ध बाज़ार रोड से गुजरने वाला हर व्यक्ति उस जगह को देखकर गौरवान्वित महसूस कर रहा है, जहाँ मलबे के बीच से सामाजिक समरसता की एक नई इबारत लिखी जा रही है।
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