Monday, January 26, 2026
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किताबों के महाकुंभ में चमकी निगम स्कूलों की ‘नई सोच’: पहली बार लगा MCD शिक्षा विभाग का स्टॉल

– दिल्ली दर्पण टीवी 

नई दिल्ली के भारत मंडपम में सजे विश्व पुस्तक मेले की चमक इस बार कुछ खास है। दिल्ली नगर निगम (MCD) के शिक्षा विभाग ने पहली बार अपना स्टॉल लगाकर एक नई इबारत लिखी है। शिक्षा समिति के चेयरमैन श्री योगेश वर्मा और शिक्षा निदेशक श्री निखिल तिवारी ने जब इस काउंटर की शुरुआत की, तो यह सिर्फ एक उद्घाटन नहीं बल्कि निगम स्कूलों के उन हजारों बच्चों के सपनों का प्रदर्शन था, जो हर रोज कुछ नया सीख रहे हैं। यह पहली बार है जब निगम की शिक्षा व्यवस्था को इतने बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर आम जनता के सामने खुलकर रखा गया है।

इस स्टॉल की सबसे बड़ी खूबसूरती यहाँ दिखाई देने वाली वह ‘नई सोच’ है, जो किताबों से इतर बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर देती है। यहाँ ‘एडुपाथ’ जैसी शिक्षण सामग्रियों के जरिए यह दिखाया गया है कि कैसे खेल-खेल में पढ़ाई को बोझ से मुक्त बनाया जा सकता है। शिक्षकों द्वारा तैयार की गई विशेष वर्कशीट्स और हर कक्षा के लिए बनाए गए खास लर्निंग टूल्स को देखकर यहाँ आने वाले अभिभावक भी दंग हैं। यह कोशिश दर्शाती है कि निगम के स्कूलों में अब पढ़ाई केवल ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसे जीवन से जोड़ने के नए तरीके खोजे जा रहे हैं।

स्टॉल पर सजी ‘सफलता की कहानियाँ’ उन नन्हे बच्चों और समर्पित शिक्षकों की मेहनत बयां करती हैं, जिन्होंने संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े बदलाव कर दिखाए हैं। यहाँ दिल्ली के अलग-अलग कोनों से आए स्कूलों के बेहतरीन कामों की एक छोटी सी झलक (सैंपल प्रदर्शनी) लगाई गई है। इस स्टॉल पर आने वाले लोग न केवल इन प्रयोगों को देख सकते हैं, बल्कि यह भी समझ सकते हैं कि कैसे सरकारी स्कूलों की आबोहवा बदल रही है। विभाग की योजना है कि इन तमाम बेहतरीन कोशिशों को अगले साल एक किताब की शक्ल दी जाए, ताकि यह अनुभव सबके काम आ सकें।

चेयरमैन श्री योगेश वर्मा ने इस पहल को जमीनी स्तर पर ले जाने की बात कहते हुए विभाग के प्रयासों को सराहा। उन्होंने महसूस किया कि जो खुशी और सकारात्मकता यहाँ दिख रही है, उसे दिल्ली के हर इलाके और हर स्कूल तक पहुँचाना जरूरी है। इस स्टॉल के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अगर सही दिशा और प्यार मिले, तो निगम स्कूलों के बच्चे भी दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं। यह स्टॉल केवल किताबों का संग्रह नहीं, बल्कि निगम शिक्षा विभाग के प्रति बढ़ते विश्वास का एक जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है।

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