– दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली। कृषि उपज मंडी समिति (APMC–MNI) के निर्वाचित सदस्यों की औपचारिक गजट अधिसूचना में हो रही देरी का मामला अब दिल्ली उच्च न्यायालय की चौखट तक पहुँच गया है। इस संबंध में एक रिट याचिका दायर कर प्रशासन को वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
गौरतलब है कि एपीएमसी (एमएनआई) के चुनाव 6 दिसंबर 2022 को संपन्न हुए थे। इन चुनावों में प्रवीण कोहली उर्फ राजू कोहली समिति के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए थे। 8 दिसंबर 2022 को कृषि विपणन निदेशक द्वारा निर्वाचित सदस्यों के नामों की अधिसूचना जारी कर दी गई थी।
हालांकि, नियमानुसार निर्वाचित सदस्यों के नामों को उपराज्यपाल द्वारा आधिकारिक राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया जाना आवश्यक है। काफी समय बीत जाने और प्रवीण कोहली द्वारा कई बार प्रतिनिधित्व एवं स्मरण पत्र दिए जाने के बावजूद उपराज्यपाल की ओर से गजट अधिसूचना जारी नहीं की गई।
लगातार हो रही देरी के चलते प्रवीण कोहली ने अक्टूबर 2025 में अपने अधिवक्ताओं ऋषभ कपूर, विशाल छाबड़ा और जितेंद्र कोहली के माध्यम से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की। याचिका में मांग की गई है कि उपराज्यपाल को एपीएमसी (एमएनआई) के विधिवत निर्वाचित सदस्यों के नाम राजपत्र में प्रकाशित करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि समिति विधि के अनुसार कार्य कर सके।
मामला पहली बार 29 अक्टूबर 2025 को न्यायालय की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ, जहां उपराज्यपाल को नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 18 दिसंबर 2025 की तारीख निर्धारित की गई, लेकिन भारी मामलों की सूची के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
इस बीच, विपणन ढांचे में कुछ प्रशासनिक बदलाव भी हुए हैं। जानकारी के अनुसार एक मार्केटिंग बोर्ड की नियुक्ति की गई है, जिसे प्रवीण कोहली द्वारा उठाए गए कानूनी कदम का परिणाम माना जा रहा है।
व्यापारियों और कृषि समुदाय के बीच अब 24 फरवरी 2026 की सुनवाई को लेकर विशेष उत्सुकता है। बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि समिति की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से लंबित कार्यों को गति मिलेगी और मंडी संचालन में पारदर्शिता एवं सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी।
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