दिल्ली दर्पण ब्यूरो
अगर पुलिस संजीदगी, समझदारी और ईमानदारी से काम करे तो अपराधी को ढूंढ ही लाती है, फिर चाहे वह कितना ही शातिर क्यों न हो; ऐसा ही बेमिसाल उदाहरण मैदानगढ़ी पुलिस थाने की टीम ने पेश किया है। इस पूरे मामले की सफलता की रीढ़ HC मनीष और HC पंकज की काबिलियत और उनकी कर्तव्यनिष्ठ नियत रही, जिन्होंने अपनी पेशेवर सूझबूझ से एक अंधे मामले (Blind Case) को सुलझाकर खाकी का मान बढ़ाया है। घटना की शुरुआत 16 फरवरी 2026 को हुई, जब राजपुर खुर्द गांव में आरती शर्मा के घर से करीब 15 लाख रुपये की चोरी हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए HC मनीष और HC पंकज ने जांच की कमान संभाली और केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर पसीना बहाया। उनकी जांच का तरीका पारंपरिक और आधुनिक पद्धतियों का एक बेहतरीन संगम था; उन्होंने घटनास्थल के आस-पास के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का घंटों बारीक विश्लेषण किया और साथ ही स्थानीय मुखबिरों के जाल को सक्रिय किया।
तफ्तीश के दौरान इन जांबाजों की पैनी नज़र और पेशेवर अनुभव तब रंग लाया, जब उन्होंने इलाके के चाबी बनाने वालों (Key Makers) से पूछताछ शुरू की। अपनी संजीदगी और लगन के दम पर उन्होंने एक ऐसे चाबी वाले को ढूंढ निकाला जिसने आरोपी की पहचान पुख्ता की। HC मनीष और HC पंकज की इसी अटूट निष्ठा और ईमानदारी का नतीजा था कि पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपी सुधीर कुमार के ठिकाने का सटीक पता लगाया और उसे संगम विहार से धर दबोचा। उनकी सूझबूझ से हुई पूछताछ के बाद न केवल आरोपी ने अपना जुर्म कबूला, बल्कि उसकी निशानदेही पर 4 लाख 54 हजार रुपये की नकदी और सोने-हीरे के कीमती आभूषणों की शत-प्रतिशत बरामदगी भी संभव हो सकी।
मैदानगढ़ी पुलिस के इन जवानों ने यह साबित कर दिया है कि जब इरादे नेक और नियत साफ़ हो, तो न्याय की जीत निश्चित होती है।

