नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली का दल्लूपुरा इलाका उस वक्त दहल गया जब एक युवक ने खुद को सीने में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। रूह कंपा देने वाली इस घटना का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि जब युवक पिस्टल लोड कर अपनी जान ले रहा था, उसका दोस्त बचाने के बजाय वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। न्यू अशोक नगर थाना क्षेत्र की यह वारदात न केवल मानवीय संवेदनाओं के खत्म होने का प्रमाण है, बल्कि स्थानीय प्रशासन और MCD के उन दावों पर भी तमाचा है जो सुरक्षित दिल्ली की बात करते हैं।
वीडियो में ‘गाइड’ करता रहा दोस्त, सेकंडों में खत्म हुई जिंदगी
मृतक की पहचान पवन के रूप में हुई है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि पवन पिस्टल में मैगजीन लोड कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि पीछे से वीडियो बना रहा दोस्त उसे रोकने के बजाय पिस्टल चलाने के तरीके बता रहा है। जैसे ही गोली चली, पवन लहूलुहान होकर गिर पड़ा और अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। सवाल यह है कि एक रिहायशी इलाके में सरेआम लाइसेंसी हथियारों का इस तरह प्रदर्शन और दुरुपयोग कैसे संभव है?
MCD और स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला
इस घटना ने दल्लूपुरा जैसे घने बसे इलाकों में प्रशासनिक नियंत्रण की पोल खोल दी है:
- सुरक्षा ऑडिट कहाँ है?: रिहायशी इलाकों में अवैध गतिविधियों और सुरक्षा मानकों की निगरानी करने में MCD और स्थानीय निकाय पूरी तरह विफल रहे हैं। क्या निगम पार्षदों और अधिकारियों की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित है?
- हथियारों का तमाशा: रिहायशी कॉलोनियों में लाइसेंसी हथियारों के साथ रील बनाना और जानलेवा स्टंट करना आम हो गया है। प्रशासन ने इन इलाकों में गश्त और सुरक्षा नियमों को ताक पर रख दिया है।
- बढ़ता अपराध और सुसाइड: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में बढ़ते तनाव और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण युवाओं में इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसे रोकने के लिए न तो निगम और न ही पुलिस कोई जागरूकता अभियान चला रही है।
दोस्त की पिस्टल, पवन की जान और पुलिस की तफ्तीश
शुरुआती जांच में सामने आया है कि पिस्टल पवन के उसी दोस्त की थी जो वीडियो बना रहा था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि लाइसेंसी हथियार किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में कैसे पहुँचा? क्या यह सिर्फ एक सुसाइड है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है?

