नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार की सुबह उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक चार मंजिला इमारत आग के गोले में तब्दील हो गई। इस दिल दहला देने वाले हादसे में 6 मासूम जिंदगियां जिंदा जलकर राख हो गईं। पालम मेट्रो स्टेशन के पास गली नंबर 2 में स्थित इस इमारत में सुबह 7 बजे आग लगी, जिसने देखते ही देखते 18 लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। दमकल की 30 गाड़ियों ने मौके पर पहुँचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
ग्राउंड फ्लोर पर दुकान, ऊपर मौत का जाल
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक कॉस्मेटिक की दुकान में लगी और पलक झपकते ही ऊपर की मंजिलों तक जा पहुँची। इमारत से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता आग की चपेट में होने के कारण लोग अंदर ही फंस गए। अपनी जान बचाने के लिए कुछ लोग ऊपर से कूद गए, लेकिन 6 बदनसीब लोग धुएं और लपटों के बीच घुटकर रह गए।
MCD और फायर विभाग पर ‘तीखा’ वार
यह हादसा प्राकृतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक हत्या है। यहाँ सीधे तौर पर नगर निगम (MCD) को कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए:
- अवैध कमर्शियल एक्टिविटी: रिहायशी इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर कॉस्मेटिक जैसी ज्वलनशील सामग्री की दुकान को मंजूरी किसने दी? क्या एमसीडी के अधिकारी इन तंग गलियों में चल रहे ‘मौत के अड्डों’ से अनजान हैं?
- बिल्डिंग बायलॉज की धज्जियां: चार मंजिला इमारत में न तो फायर एग्जिट (निकास द्वार) था और न ही आग बुझाने के कोई उपकरण। एमसीडी का विजिलेंस विभाग क्या सिर्फ उगाही के लिए बना है?
- तंग गलियां और अतिक्रमण: दमकल की 30 गाड़ियां मौके पर तो पहुँचीं, लेकिन अतिक्रमण और संकरी गलियों के कारण उन्हें घंटों मशक्कत करनी पड़ी। एमसीडी ने इन गलियों से अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल खानापूर्ति की है।
जिम्मेदार कौन?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की मिलीभगत से ऐसी इमारतों में खुलेआम कमर्शियल काम हो रहे हैं। आज 6 घरों के चिराग बुझ गए, लेकिन क्या किसी अधिकारी पर गाज गिरेगी? या फिर हर बार की तरह जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
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