Wednesday, April 1, 2026
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संसद के ‘मकर द्वार’ पर विपक्ष का हल्लाबोल: FCRA संशोधन विधेयक को बताया ‘काला कानून’; वापसी की मांग को लेकर भारी विरोध

नई दिल्ली: बजट सत्र के दौरान बुधवार (1 अप्रैल 2026) को संसद परिसर में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने एकजुट होकर संसद के मकर द्वार (Makar Dwar) पर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी दल विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill, 2026) को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। सांसदों का आरोप है कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को निशाना बनाने के लिए लाया गया है।

“अल्पसंख्यकों और NGOs के लिए दमनकारी”: विपक्ष के आरोप

विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेताओं ने विधेयक पर कड़े प्रहार किए:

  • हिबी ईडन (कांग्रेस सांसद): उन्होंने इसे एक ‘दमनकारी कानून’ (Draconian Law) करार दिया। ईडन ने कहा कि यह न केवल अल्पसंख्यकों बल्कि भारत में काम कर रहे कई सेवाभावी NGOs के हितों को भी नुकसान पहुँचाएगा।
  • एन.के. प्रेमचंद्रन (RSP सांसद): उन्होंने आरोप लगाया कि यह किसी एक समुदाय का मुद्दा नहीं है, बल्कि भाजपा का एक सुनियोजित एजेंडा है ताकि अल्पसंख्यकों के अधिकारों और विशेषाधिकारों को छीना जा सके।
  • धर्मवीर गांधी (कांग्रेस सांसद): उन्होंने कहा कि कानून निष्पक्ष होना चाहिए और समाज के सभी वर्गों के लिए फायदेमंद होना चाहिए, लेकिन यह विधेयक ‘चयनात्मक’ (Selective) प्रतीत होता है।

क्या है FCRA संशोधन विधेयक, 2026?

यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य विदेशी चंदे के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है।

  • नई अथॉरिटी का गठन: विधेयक में एक ‘नामित प्राधिकरण’ (Designated Authority) बनाने का प्रस्ताव है, जो उन संगठनों की संपत्ति को जब्त और प्रबंधित कर सकेगा जिनका लाइसेंस रद्द हो जाता है।
  • सख्त निगरानी: सरकार का कहना है कि यह संशोधन राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के खिलाफ विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी है।

सरकार का रुख: “धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए खतरनाक”

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह कानून उन लोगों के लिए ‘खतरनाक’ है जो विदेशी धन का उपयोग जबरन धर्म परिवर्तन या राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए करते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक संस्था को बिना वजह निशाना नहीं बनाया जा रहा है।

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