Friday, April 10, 2026
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पश्चिम एशिया संकट: व्यापार और MSME पर मंडराया खतरा, कैट ने वित्त मंत्री से की ‘टास्क फोर्स’ के गठन की मांग

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने भारतीय व्यापार जगत की चिंता बढ़ा दी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस संकट से घरेलू व्यापार और विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को लेकर केंद्र सरकार को आगाह किया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर तत्काल राहत उपायों और एक विशेष ‘टास्क फोर्स’ बनाने का आग्रह किया है।

प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना, लेकिन भविष्य की चिंता
श्री खंडेलवाल ने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सरकार की सक्रियता के कारण अब तक वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आपूर्ति श्रृंखला स्थिर बनी हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया के ताजा तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर पेट्रोकेमिकल्स, फार्मा, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, फर्टिलाइजर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ेगा।

निर्यातकों और MSME के सामने दोहरी चुनौती
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी. भरतिया ने बताया कि शिपमेंट में देरी, रूट परिवर्तन और बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी से निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और कार्यशील पूंजी (Working Capital) पर बढ़ते दबाव के कारण MSME क्षेत्र के मुनाफे में कमी और ऋण भार बढ़ने की गंभीर चिंता है।

राहत उपायों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
व्यापारी नेताओं ने सरकार से निम्नलिखित राहत कदमों की मांग की है:

कर्ज राहत: MSME को ऋण चुकाने के लिए अतिरिक्त समय और विशेष क्रेडिट गारंटी योजना।

ब्याज सब्सिडी: युद्ध से बुरी तरह प्रभावित उद्योगों को ब्याज में छूट।

निर्यात सहायता: निर्यातकों के लिए फ्रेट (माल ढुलाई) और बीमा में वित्तीय सहायता एवं त्वरित रिफंड।

मूल्य नियंत्रण: ईंधन और कच्चे माल की कीमतों की निरंतर निगरानी और स्थिरीकरण।

‘ इम्पैक्ट असेसमेंट टास्क फोर्स’ का प्रस्ताव
कैट ने सुझाव दिया है कि एक “वेस्ट एशिया इम्पैक्ट असेसमेंट एवं रिस्पॉन्स टास्क फोर्स” का गठन किया जाए। इसमें संबंधित मंत्रालयों, आरबीआई और व्यापार संगठनों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, जो स्थिति का वास्तविक समय पर आकलन कर तुरंत नीतिगत निर्णय ले सकें। श्री खंडेलवाल ने विश्वास जताया कि समय पर उठाए गए कदम ही आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करेंगे।

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