नई दिल्ली: असम में विधानसभा चुनाव (अप्रैल 2026) के शोर के बीच ‘गौ मांस’ (Beef) को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का एक पुराना वीडियो साझा कर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। AAP ने आरोप लगाया है कि BJP के लिए ‘गौ माता’ केवल एक चुनावी मुद्दा और दंगा भड़काने का जरिया है, जबकि उनके अपने नेता निजी तौर पर अलग राय रखते हैं।
AAP का बड़ा हमला: “BJP के लिए गौ माता महज़ चुनावी जुमला”
आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से मुख्यमंत्री सरमा का एक बयान साझा किया है, जिसमें वे कथित तौर पर कह रहे हैं— “गौ मांस खाओ, लेकिन घर के अंदर खाओ, हम मना नहीं कर रहे हैं।” इस वीडियो को आधार बनाकर AAP ने सवाल उठाया कि एक तरफ उत्तर भारत में ‘गौरक्षा’ के नाम पर हिंसा और हत्याएं की जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ BJP के सबसे बड़े नेताओं में से एक इसे घर के अंदर खाने की छूट दे रहे हैं। AAP ने इसे BJP का ‘पाखंड’ करार दिया है।
हिमंता सरमा का चुनावी दांव: विपक्षी उम्मीदवार पर साधा निशाना
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा खुद असम में एक विपक्षी उम्मीदवार कुंकी चौधरी (कांग्रेस समर्थित AJP उम्मीदवार) को ‘बीफ’ के मुद्दे पर घेर रहे हैं। सरमा ने हाल ही में चुनावी रैलियों में आरोप लगाया कि कुंकी चौधरी के माता-पिता ने सोशल मीडिया पर गौ मांस खाते हुए फोटो डाली थी। सरमा ने धमकी दी है कि चुनाव खत्म होने के बाद वे असम मवेशी संरक्षण अधिनियम (Assam Cattle Preservation Act) के तहत उन पर FIR दर्ज कराएंगे और उन्हें जेल भेजेंगे।
क्या कहता है असम का कानून?
इस पूरे विवाद के बीच असम के कानून को समझना जरूरी है:
- असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2021: यह कानून मंदिरों और वैष्णव सत्रों के 5 किलोमीटर के दायरे में और हिंदू/जैन बाहुल्य क्षेत्रों में गौ मांस की बिक्री और उपभोग पर प्रतिबंध लगाता है।
- विपक्ष का पलटवार: विपक्षी दल कुंकी चौधरी ने इन आरोपों को ‘फेक’ और ‘डीपफेक’ बताया है। उनका कहना है कि BJP हार के डर से धार्मिक भावनाओं को भड़का रही है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
AAP द्वारा साझा किए गए वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह BJP के ‘दोहरे चरित्र’ को उजागर करता है, जहाँ पूर्वोत्तर राज्यों (असम, मेघालय, नागालैंड) में उनके सुर अलग होते हैं और उत्तर भारत के राज्यों में अलग। फिलहाल, असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस ‘बीफ वॉर’ ने माहौल को और अधिक गरमा दिया है।

