दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में अधिवक्ता परिषद, दिल्ली (तीस हजारी इकाई) द्वारा ‘न्याय, नैतिकता एवं युवा चेतना’ विषय पर एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। तीस हजारी न्यायालय के लालचंद वत्स हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा अधिवक्ताओं और छात्रों को स्वामी जी के चरित्र और उनके राष्ट्र-निर्माण के संकल्प से जोड़ना था।
चरित्र निर्माण और आत्मबल पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, रामकृष्ण मिशन के स्वामी सर्वलोकानंद जी महाराज ने अपने संबोधन में युवाओं को विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में भौतिक सुख-सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन आत्मिक शांति और नैतिकता पीछे छूटती जा रही है। स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि बिना संस्कारों और नैतिक मूल्यों के मानव जीवन का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर अपने चरित्र का निर्माण करें और आत्मबल के साथ राष्ट्र सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ें।

संवैधानिक और सांस्कृतिक मूल्यों का संगम
जेएनयू के प्रोफेसर डॉ. प्रवेश के. चौधरी ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि भारत की आत्मा समरसता में बसती है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमारा संविधान भी उन्हीं सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतिबिंब है जो विवेकानंद जी ने दुनिया को सिखाए थे। युवाओं को इन संवैधानिक और नैतिक मूल्यों को अपनाकर देश को नई दिशा देनी चाहिए।

न्यायिक जगत की बड़ी हस्तियां रहीं मौजूद
कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पश्चिम) सुश्री अदिति चौधरी, परिवार न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश सुश्री विनीता गोयल और जिला न्यायाधीश श्री संदीप कुमार शर्मा सहित कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। दिल्ली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी. के. शर्मा और अधिवक्ता परिषद के विभिन्न पदाधिकारियों ने भी युवाओं का उत्साहवर्धन किया।
इस सफल आयोजन में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि युवा अधिवक्ताओं ने न केवल चर्चा में भाग लिया, बल्कि 8 नए सदस्यों ने ‘न्याय प्रवाह’ की सदस्यता ग्रहण कर संगठन के विस्तार में अपनी रुचि दिखाई।
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