नई दिल्ली:
आमतौर पर जब किसी मरीज को स्टेज-IV कैंसर होने की जानकारी मिलती है, तो उम्मीदें लगभग खत्म हो जाती हैं। लेकिन दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) में सामने आया एक मामला उन तमाम मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है, जो इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली 42 वर्षीय मुनमुन झा स्टेज-IV कोलन कैंसर से पीड़ित थीं। बीमारी इस हद तक बढ़ चुकी थी कि कैंसर उनके शरीर के कई हिस्सों में फैल गया था और पेट में अत्यधिक सूजन आ गई थी। मुनमुन ने देश के कई अस्पतालों में इलाज करवाया, लेकिन कहीं से भी राहत नहीं मिली।
AIIMS पहुंचकर बदली किस्मत
लगातार असफल इलाज के बावजूद मुनमुन ने हार नहीं मानी और देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल AIIMS दिल्ली का रुख किया। यहां डॉक्टरों की टीम ने उनके अब तक हुए इलाज से जुड़े सभी दस्तावेजों और मेडिकल रिपोर्ट्स का गहन अध्ययन किया और फिर इलाज की नई रणनीति तैयार की।
19.9 किलो ट्यूमर निकालकर रचा इतिहास
AIIMS दिल्ली के प्रो. डॉ. एम.डी. रे और उनकी विशेषज्ञ टीम ने 12 जनवरी 2026 को दो चरणों में एक बेहद जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। इस सर्जरी के दौरान मुनमुन के पेट से 19.9 किलो वजनी विशाल ट्यूमर को पूरी तरह सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। इसके बाद 15 जनवरी को उनकी HIPEC सर्जरी भी की गई, जो कैंसर के उन्नत मामलों में एक विशेष उपचार प्रक्रिया मानी जाती है।

अब पूरी तरह स्वस्थ, लौट आई मुस्कान
सफल सर्जरी और इलाज के बाद मुनमुन झा अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने घर पर सामान्य व खुशहाल जीवन बिता रही हैं। यह मामला न केवल मेडिकल साइंस की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि उन हजारों मरीजों के लिए प्रेरणा भी है जो स्टेज-IV कैंसर से जूझ रहे हैं।
स्टेज-IV कैंसर भी अब लाइलाज नहीं
AIIMS के डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और विशेषज्ञ इलाज की मदद से आज के दौर में स्टेज-IV कैंसर का भी इलाज संभव है। मुनमुन झा का यह केस इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सही समय पर सही इलाज मिलने से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
इस सफलता ने न जाने कितने निराश मरीजों और उनके परिवारों के मन में यह विश्वास जगा दिया है कि कैंसर की इस अंतिम स्टेज से भी जंग जीती जा सकती है।
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