नई दिल्ली: कथित दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में बड़ी राहत देते हुए दिल्ली की Rouse Avenue Court ने आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और 21 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा साबित करने में विफल रही।
CBI को कोर्ट की फटकार
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि एजेंसी का मामला न्यायिक जांच की कसौटी पर खरा नहीं उतरता और साजिश की कहानी अनुमानों के आधार पर गढ़ी गई प्रतीत होती है।
बरी किए गए अन्य 21 आरोपियों में के. कविता का नाम भी शामिल है। यह मामला दिल्ली सरकार की उस आबकारी नीति से जुड़ा था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था।
फैसले के बाद भावुक हुए केजरीवाल
निर्णय के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला “स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश” था।
केजरीवाल ने कहा, “कोर्ट ने साबित कर दिया है कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार हैं।” गौरतलब है कि इस मामले में केजरीवाल लगभग छह महीने जेल में रहे, जबकि मनीष सिसोदिया करीब दो वर्ष तक हिरासत में रहे।
फैसले के बाद केजरीवाल अपने आवास से पार्टी कार्यालय जाते समय समर्थकों का अभिवादन करते नजर आए और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा।
हाईकोर्ट जाएगी CBI
हालांकि, CBI ने स्पष्ट किया है कि वह निचली अदालत के फैसले को चुनौती देगी। एजेंसी ने कहा कि वह जल्द ही Delhi High Court में अपील दायर करेगी।
अदालत के इस फैसले के बाद दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे “सत्य की जीत” बता रही है, वहीं CBI के हाईकोर्ट जाने के फैसले से यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है।
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