दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एक बड़े फर्जी सरकारी नौकरी रैकेट का पर्दाफाश किया है। आईएफएसओ (IFSO) यूनिट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), संस्कृति मंत्रालय के नाम पर फर्जी भर्ती प्रक्रिया चला रहे गिरोह को धराशायी करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी इंटरव्यू के नाम पर अभ्यर्थियों से ठगी करने की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने कार्रवाई कर दी।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एएसआई की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती एक नकली वेबसाइट तैयार की थी। इसी वेबसाइट के जरिए एएसआई में 7 क्यूरेटर और 84 जूनियर असिस्टेंट, कुल 91 पदों पर फर्जी वैकेंसी निकाली गई थी। ठगों ने इस वेबसाइट का लिंक कॉलेज ग्रुप्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए बड़े पैमाने पर वायरल किया।
इस फर्जी भर्ती प्रक्रिया के झांसे में आकर देशभर से सैकड़ों बेरोजगार युवाओं ने आवेदन कर दिया। आरोपियों ने भरोसा बढ़ाने के लिए जयपुर के एक नामी परीक्षा केंद्र में बाकायदा लिखित परीक्षा भी आयोजित कराई। योजना यह थी कि लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के नाम पर बुलाकर उनसे मोटी रकम वसूली जाए।
हालांकि, इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट को इस रैकेट की भनक लग गई। समय रहते की गई कार्रवाई में पुलिस ने पूरे गिरोह की साजिश को नाकाम कर दिया और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का मुख्य आरोपी कुलदीप (30) है, जो राजस्थान के जयपुर का रहने वाला है। वह बी.कॉम ग्रेजुएट है और एलएलबी के सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था। वहीं, दूसरा आरोपी पियूष (25) है, जो पेशे से वेब डेवलपर है और उसके पास कंप्यूटर साइंस में बी.टेक की डिग्री है। दोनों आरोपी जयपुर के निवासी हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 1 डेस्कटॉप कंप्यूटर, 1 आईपैड, 1 टैबलेट और कई पासबुक बरामद की हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से फर्जी वेबसाइट और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अहम सबूत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कितने अभ्यर्थियों से अब तक ठगी की जा चुकी है।
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