नई दिल्ली:– दिल्ली दर्पण ब्यूरो
देश की राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार सुबह एक रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है। एक रिहायशी इमारत की तीसरी मंजिल पर भीषण आग लगने के कारण एक ही परिवार के 9 सदस्यों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में मातम और आक्रोश पैदा कर दिया है। आम आदमी पार्टी के नेता और मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मौके का मुआयना करने के बाद दिल्ली फायर सर्विस और भाजपा सरकार पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सुबह लगभग 6:00 से 6:30 बजे के बीच लगी थी, लेकिन फायर ब्रिगेड की टीम करीब एक घंटे की देरी से सुबह 7:30 बजे मौके पर पहुँची।
हादसे के समय का मंजर बेहद खौफनाक था। इमारत की तीसरी मंजिल पर फंसा परिवार बालकनी से मदद के लिए चीख रहा था, लेकिन नीचे से उठती आग की लपटों और धुएं के कारण वे सीढ़ियों से नीचे नहीं उतर सके। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि मौके पर पहुँची फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक लिफ्ट ऐन वक्त पर खराब हो गई और खुल ही नहीं पाई। इतना ही नहीं, दमकल विभाग के पास मौजूद सीढ़ियाँ भी इतनी छोटी थीं कि वे तीसरी मंजिल तक नहीं पहुँच सकीं। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आपात स्थिति में लोगों के नीचे कूदने के लिए फायर ब्रिगेड के पास कोई सुरक्षा जाल (Net) तक उपलब्ध नहीं था।
इस जानलेवा आग के बीच एक पिता की बेबसी और हिम्मत का दिल दहला देने वाला उदाहरण भी देखने को मिला। परिवार के सदस्य सचिन ने अपनी मात्र 6 महीने की मासूम बच्ची को बचाने के लिए उसे तीसरी मंजिल से नीचे फेंक दिया, जिसे नीचे खड़े लोगों ने सुरक्षित लपक लिया। इसके बाद सचिन और एक 14-15 साल का किशोर भी जान बचाने के लिए ऊपर से कूद गए। ये तीनों गंभीर रूप से घायल हैं और फिलहाल अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, लेकिन परिवार के बाकी 9 सदस्य अपनी आँखों के सामने जलकर खाक हो गए।
सौरभ भारद्वाज ने इस घटना को ‘प्रशासनिक हत्या’ करार देते हुए भाजपा नेता रेखा गुप्ता और केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार वीआईपी सुविधाओं और यमुना में वीवीआईपी नावों पर करोड़ों रुपये बहा रही है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली की जनता को बचाने के लिए फायर ब्रिगेड के पास बुनियादी उपकरण और ठीक सीढ़ियाँ तक नहीं हैं। उन्होंने पिछले साल द्वारका और रोहिणी में हुई इसी तरह की घटनाओं का हवाला देते हुए मीडिया और प्रशासन से जवाब माँगा है कि आखिर कब तक मासूमों की जान इस तरह की लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी।
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