DUSU चुनाव को हमेशा से युवाओं का मूड समझने का बैरोमीटर माना गया है। 18 सितम्बर को होने वाले इस चुनाव को लेकर इस बार दिल्ली बीजेपी और कांग्रेस ने पूरी ताक़त झोंक दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, जो खुद छात्र राजनीति से निकली हैं, कॉलेज कैंपस में जाकर अपनी कामयाबी की कहानियाँ सुनाती दिख रही हैं। वहीं छात्रों के लिए नए कार्यक्रमों का ऐलान कर रही हैं, ताकि युवा मतदाताओं का रुझान बीजेपी की ओर मोड़ा जा सके।
वहीं कांग्रेस NSUI के ज़रिए चारों सीटों पर जीत का दावा कर रही है। उनका कहना है कि यह चुनाव सिर्फ़ DUSU तक सीमित नहीं, बल्कि देश में लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। नॉर्थ दिल्ली में NSUI उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित विशाल सभा में दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इस जंग को सीधे बिहार चुनावों से जोड़ते हुए कहा कि यह युवाओं की आवाज़ और देश के भविष्य की दिशा तय करेगा। कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने भी मंच से केंद्र और राज्य सरकार को निशाने पर लिया।”
पार्टी के बड़े नेता ही नहीं, स्थानीय स्तर पर विधायक और कार्यकर्ता भी पूरी ताक़त से जुट गए हैं। बीजेपी की विधायक पूनम भारद्वाज छात्रों के बीच पहुँच रही हैं तो कांग्रेस के स्थानीय नेता भी कॉलेजों और इलाकों में जाकर छात्रों से सीधा संवाद कर रहे हैं।
इस बार DUSU चुनाव सिर्फ़ कैंपस की जंग नहीं है। यहाँ की जीत और हार का असर बिहार और आने वाले विधानसभा चुनावों तक गूँज सकता है। अगले दो दिनों में दिल्ली विश्वविद्यालय सिर्फ़ छात्र राजनीति का नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का भी केंद्र बनने वाला है। नतीजे यह बताएंगे कि देश के युवाओं का मूड किस ओर है।

