Wednesday, February 11, 2026
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दिल्ली में बढ़ते कैंसर मामलों पर कांग्रेस का निशाना, स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार की उठी मांग

दिल्ली में कैंसर के लगातार बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंताओं को गहरा कर दिया है। आईसीएमआर–नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के नए आंकड़ों में राजधानी में कैंसर की तेज़ी से बढ़ती दर सामने आने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल भी तेज़ हो गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इन आंकड़ों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि “दिल्ली की स्थिति हर साल और भयावह होती जा रही है, लेकिन सरकारें आंखें मूंदकर बैठी हैं।”

चौंकाने वाले आंकड़े

यादव ने बताया कि राजधानी में पिछले तीन सालों में कैंसर के मामले लगातार बढ़े हैं—

  • 2022: 26,735
  • 2023: 27,561
  • 2024: 28,387

कांग्रेस नेता का कहना है कि इन आंकड़ों के पीछे सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियां भी छिपी हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर का नाम सुनते ही मरीज अपनी दुनिया बिखरती हुई महसूस करता है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में आधुनिक इलाज, समय पर जांच और सही सुविधा मिलना आज भी चुनौती बना हुआ है।

देवेंद्र यादव ने आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार और मौजूदा बीजेपी शासित रेखा गुप्ता सरकार—दोनों को इस बदहाल स्वास्थ्य ढांचे के लिए जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि इलाज के इंतज़ार में कई मरीजों की हालत बिगड़ जाती है और गरीब परिवारों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जो उनकी पहुंच से बाहर होते हैं।

प्रदूषण और मिलावटी खाना — खतरा बढ़ाने वाली बड़ी वजहें

कांग्रेस नेता ने कहा कि दिल्ली में कैंसर बढ़ने का एक बड़ा कारण प्रदूषण है। उन्होंने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए बताया कि राजधानी की जहरीली हवा, बढ़ता धूलकण, तनाव, और जीवनशैली में असंतुलन बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं।

यादव ने कहा कि फेफड़ों के कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, और जब हवा ही जहरीली हो, तो बीमारी का फैलना स्वाभाविक है। इसके अलावा उन्होंने मिलावटी खाद्य पदार्थों, तंबाकू और शराब के सेवन को भी कैंसर का प्रमुख कारण बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें खुद इन उत्पादों की बिक्री से बड़ा राजस्व कमाती हैं, लेकिन उसी हिसाब से स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने की जिम्मेदारी नहीं निभातीं। यादव ने तंज करते हुए कहा, “सरकार कमाई तो करती है, पर मरीजों को दवाइयों व स्क्रीनिंग की मुफ्त सुविधा देने से पीछे हट जाती है।”

स्वास्थ्य ढांचे पर गंभीर सवाल

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि दिल्ली में कई सरकारी अस्पतालों में स्क्रीनिंग सुविधाएं सीमित हैं, मशीनें पुरानी हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। उनका कहना है कि यही वजह है कि कई लोगों में कैंसर देर से पहचान में आता है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने तो यह आरोप भी लगाया कि सरकार की लापरवाही के चलते बाज़ारों में कैंसर की नकली दवाएं तक बिक रही हैं, जिससे मरीज उपचार की जगह जान गंवा रहे हैं। उन्होंने इसे राजधानी के लिए “सबसे बड़ा दुर्भाग्य” बताया।

दिल्ली में कैंसर का भविष्य—एक गंभीर चेतावनी

कांग्रेस द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 0–74 वर्ष की आयु में—

  • हर 6 पुरुषों में 1,
  • और हर 7 महिलाओं में 1,
    को जीवनकाल में कैंसर होने का खतरा है।

पुरुषों में कैंसर निदान की औसत आयु 58 वर्ष और महिलाओं में 55 वर्ष बताई गई है—जो यह संकेत देती है कि राजधानी का वातावरण, प्रदूषण और जीवनशैली लोगों को पहले से ही बीमार कर रही है।

यादव ने दिल्ली के लगातार खतरनाक 400+ AQI स्तर को लेकर भी रेखा गुप्ता सरकार को कठघरे में खड़ा किया और कहा कि “प्रदूषण, खराब स्वास्थ्य-ढांचा और सरकारी उदासीनता मिलकर दिल्ली को बीमारी की दलदल में धकेल रहे हैं।”

अंत में कांग्रेस ने मांग की कि सरकार बड़े पैमाने पर कैंसर जागरूकता अभियान शुरू करे, स्क्रीनिंग बढ़ाए और सरकारी अस्पतालों में आधुनिक इलाज की सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराए—वरना आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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