दिल्ली में हुए ब्लास्ट ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। घटना के बाद से ही जांच एजेंसियाँ लगातार सुराग जुटाने में लगी थीं। अब इसी जांच में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अधिकारियों ने संदिग्धों—डॉ. मुजम्मिल, आदिल, शाहीन और इरफान—के मोबाइल फ़ोनों से वह डेटा भी निकाल लिया है जिसे पहले डिलीट कर दिया गया था।
इस रिकवर किए गए डेटा ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इसमें कई ऐसी डिजिटल फाइलें मिली हैं, जिन्होंने एजेंसियों का ध्यान एक बार फिर इस केस की ओर खींचा है।
डिलीटेड डेटा में क्या मिला?
हालांकि एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि रिकवर की गई फाइलों में चैट, लोकेशन हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड और कुछ वीडियो क्लिप्स शामिल हैं। इनमें से कुछ डेटा उन दिनों का है, जब ब्लास्ट से पहले संदिग्धों की गतिविधियाँ तेजी से बदल रही थीं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “मोबाइल डेटा कभी झूठ नहीं बोलता। चाहे कोई फाइल डिलीट ही क्यों न कर दे—तकनीक बहुत कुछ वापस ला सकती है।”
फॉरेंसिक टीमों के लिए चुनौती—लेकिन नतीजे अहम
फ़ोन के अंदर से डिलीट हो चुकी फाइलें निकालना आसान नहीं होता। कई बार डिवाइस लॉक होते हैं, कई बार डेटा एन्क्रिप्ट। लेकिन इस केस में लगातार कोशिशों के बाद फॉरेंसिक टीमों को सफलता मिली।
टीम ने घंटों मेहनत कर के बैकअप फोल्डर्स, कैश डेटा और ऑटो-सेव्ड फाइलों से अहम जानकारी निकाली है। हर फाइल को एक-एक करके दूसरे सबूतों से मिलाया जा रहा है ताकि तस्वीर धीरे-धीरे साफ़ हो सके।
पूछताछ और डिजिटल सुराग—जांच और गहरी हुई
अब जब डेटा रिकवर हो चुका है, जांच अधिकारी इस बात का पता लगाने में लगे हैं कि ब्लास्ट से पहले किसने किससे बात की, कौन कहां गया और किन लोगों से संपर्क में रहा।
लोकेशन रिकॉर्ड, चैट पैटर्न और फ़ोन की गतिविधियों को देखकर एक टाइमलाइन बनाई जा रही है—ताकि यह समझ में आ सके कि घटना वाले दिन कौन-कौन से रास्ते से गुजरा और किसके बीच कैसा संवाद हुआ।
एक अधिकारी ने बताया,
“यह जानकारी हमें केवल तकनीकी जवाब नहीं देती—यह हमें उन लोगों की मानसिक स्थिति और घटनाओं का क्रम भी बेहतर समझने में मदद करती है।”
अब आगे क्या?
रिकवर किया गया डेटा फिलहाल केस डायरी का हिस्सा बन रहा है और जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा। जांच एजेंसियाँ साफ़ कह रही हैं कि अभी किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा गया है। सबूतों की पुष्टि, उनके पीछे का संदर्भ और घटनाओं का क्रम—सब कुछ बेहद सावधानी से जोड़ा जा रहा है।
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियाँ इस पूरे मामले को प्राथमिकता के साथ देख रही हैं। आने वाले दिनों में संभव है कि इस केस से जुड़े और भी अहम सुराग सामने आएं, जो न सिर्फ इस ब्लास्ट को समझने में मदद करेंगे बल्कि आगे की कार्रवाई को भी तय करेंगे।

