नई दिल्ली | मुख्य संवाददाता
दिल्ली हाईकोर्ट ने द्वारका एसयूवी सड़क दुर्घटना मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए मीडिया को निर्देश दिया है कि वह आरोपी नाबालिग की पहचान किसी भी रूप में उजागर न करे। हालांकि, अदालत ने मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध (गैग ऑर्डर) लगाने से इनकार करते हुए कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता को पूरी तरह दबाया नहीं जा सकता।
प्रमुख बिंदु:
- पहचान की सुरक्षा: कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 74 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि 17 वर्षीय आरोपी का नाम, चेहरा या ऐसी कोई भी जानकारी साझा न की जाए जिससे उसकी पहचान उजागर हो।
- मीडिया ट्रायल पर चिंता: याचिकाकर्ता (नाबालिग के पिता) ने दलील दी थी कि मीडिया ट्रायल के कारण उनके परिवार को धमकियां मिल रही हैं और उनकी सुरक्षा खतरे में है।
- नोटिस जारी: न्यायमूर्ति ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, “हम मीडिया पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकते, लेकिन कानून के दायरे में रहकर रिपोर्टिंग करना अनिवार्य है।” कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित निकायों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर नाबालिग की निजता का उल्लंघन न हो।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला 3 फरवरी 2026 को द्वारका में हुई उस दुखद दुर्घटना से संबंधित है, जहाँ एक तेज रफ्तार एसयूवी की चपेट में आने से 23 वर्षीय युवक साहिल की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने एक नाबालिग को पकड़ा है।
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