दिल्ली का रविवार कुछ अलग ही था। हवा में उत्साह, बच्चों के चेहरों पर चमक, और मंच पर दो ऐसी शख्सियतें—जिन्होंने वहां मौजूद हर बच्चे को यह भरोसा दिलाया कि उनका भविष्य सच में असीमित है। AI ग्राइंड कार्यक्रम में एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का आगमन बच्चों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं लगा।
सेंट्रल पार्क में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक टेक इवेंट नहीं था, बल्कि ऐसा मंच था जहां बच्चों ने भविष्य की उन संभावनाओं को पास से महसूस किया, जिन्हें वे अब तक सिर्फ किताबों या स्क्रीन पर देखते आए थे।
“बड़े सपने देखो, और उन्हें पूरा करने का साहस रखो” — शुभांशु शुक्ला
जब एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने मंच संभाला, तो बच्चे टकटकी लगाए उन्हें देख रहे थे। जैसे वो कोई फिल्म का किरदार नहीं, बल्कि किसी असली हीरो को देख रहे हों।
उन्होंने बेहद सरल और दिल से जुड़े शब्दों में बताया कि कैसे AI और स्पेस अब एक-दूसरे के साथी बन चुके हैं। उन्होंने कहा:
“अंतरिक्ष से आने वाला डेटा इतना विशाल होता है कि उसे समझने में AI हमारी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।”

शुभांशु ने बच्चों को यह भी समझाया कि अंतरिक्ष में पहुंचने का सपना सिर्फ कुछ लोगों का अधिकार नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले हर बच्चे के लिए खुला है। मंच पर बैठी भीड़ में कई बच्चों के चेहरे चमक उठे—जैसे किसी ने भीतर जाकर एक नई उम्मीद जगा दी हो।
उन्होंने बच्चों से यह भी कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सबसे बड़ा योगदान उन्हीं का होगा, और यह तभी संभव होगा जब वे नई तकनीक को सिर्फ सीखें ही नहीं, बल्कि उसका सही उपयोग भी करें।
“AI आपकी कल्पना से भी आगे है” — मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
इसके बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बच्चों को संबोधित किया। उनका अंदाज़ बहुत ही अपनापन लिए हुए था, जैसे वे किसी परिवार के सदस्य की तरह बच्चों को समझा रही हों।
उन्होंने कहा:
“AI सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि आपकी सोच को कई गुना बढ़ाने का माध्यम है।”
रेखा गुप्ता ने दिल्ली के बच्चों की तारीफ करते हुए कहा कि आज सरकारी स्कूलों के छात्र बिना ट्यूशन के भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, और टेक्नोलॉजी ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया है।
उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि सरकार आने वाले वर्षों में AI और टेक्नोलॉजी से जुड़ी और भी पहलें करेगी, ताकि हर बच्चा अपनी क्षमता को पहचान सके।
बच्चों की भागीदारी—उत्साह और उम्मीदों से भरा माहौल
कार्यक्रम की सबसे खुबसूरत बात थी बच्चों का जोश। किसी ने AI पर आधारित जिंगल गाया, तो किसी ने छोटे-छोटे प्रश्न पूछकर अपना उत्साह जताया। शुभांशु शुक्ला और रेखा गुप्ता दोनों ही बच्चों के सवालों को बड़े ध्यान से सुन रहे थे—उनकी मुस्कान बता रही थी कि वे इस नए भारत के भविष्य को सामने देख रहे हैं।
बच्चों की आंखों में चमक थी। शायद इसलिए कि उन्होंने पहली बार अपने सामने एक असली अंतरिक्ष यात्री को देखा था। उनके लिए यह सिर्फ इवेंट नहीं, बल्कि प्रेरणा का पल था।
निष्कर्ष: AI, स्पेस और भारत का भविष्य — बच्चों के हाथों में
AI ग्राइंड कार्यक्रम ने यह साबित किया कि जब तकनीक, शिक्षा और प्रेरणा एक साथ मिलती हैं, तो बच्चों की उड़ान और भी ऊंची हो जाती है। शुभांशु शुक्ला की मौजूदगी ने उन्हें सपने देखने का साहस दिया, और रेखा गुप्ता ने उन सपनों को सही दिशा में ले जाने का भरोसा।
दिल्ली का यह इवेंट इस बात का प्रतीक है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है—जिज्ञासु, ऊर्जावान और सपने देखने वाले बच्चों के हाथों में।

