दिल्ली जैसे बड़े शहर में मोबाइल चोरी होना अब आम बात हो गई है। हर रोज़ किसी न किसी की शिकायत दर्ज होती है कि मेट्रो में सफर करते हुए जेब से फोन गायब हो गया, भीड़भाड़ वाली मंडियों में खरीदारी के दौरान पलक झपकते ही मोबाइल उड़ गया या फिर बस में सफर के दौरान किसी ने जेब साफ कर दी। लेकिन शायद ही कभी चोरी हुआ फोन वापस मिलता है। इस बार मामला कुछ और ही निकला। दिल्ली पुलिस ने लंबे समय से सक्रिय एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने मोबाइल चोरी को कारोबार बना लिया था। पुलिस की कार्रवाई में करीब 420 से ज्यादा महंगे मोबाइल बरामद हुए हैं, जिनकी बाजार कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इन फोनों को विदेश भेजा जा रहा था और वहीं मोटी कीमत पर बेचा जाता था। सोचिए, जिस फोन को कोई शख्स दिल्ली की भीड़भाड़ में खोकर पुलिस चौकी तक दौड़ रहा था, वही फोन कुछ ही हफ्तों में किसी और देश में बिक रहा था और कोई अनजान इंसान उसे नए फोन की तरह इस्तेमाल कर रहा था।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को कुछ दिनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि शहर में मोबाइल चोरी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि दिल्ली जैसे बड़े शहर में यह नई बात नहीं है, लेकिन जिस पैमाने पर चोरी हो रही थी, उसने पुलिस को भी परेशान कर दिया था। कई बार शिकायतें दर्ज करने वाले लोगों ने बताया कि चोर सिर्फ साधारण या पुराने फोन ही नहीं, बल्कि महंगे और ब्रांडेड स्मार्टफोन को ही निशाना बना रहे हैं। जिन फोन की कीमत 50 हजार से लेकर 1.5 लाख तक होती है, वही चोरी होने के ज्यादा मामले सामने आए। यही वजह थी कि पुलिस ने इस नेटवर्क को पकड़ने के लिए अलग से टीम गठित की।
पुलिस की जांच से पता चला कि यह कोई आम जेबकतरा गिरोह नहीं, बल्कि संगठित तरीके से काम करने वाला नेटवर्क था। गिरोह का काम करने का तरीका सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई। सबसे पहले छोटे-छोटे चोर या जेबकतरे दिल्ली की भीड़भाड़ वाली जगहों से मोबाइल चुराते थे। यह गिरोह खासतौर पर उन इलाकों में सक्रिय रहता था जहां भीड़ सबसे ज्यादा होती है, जैसे- मेट्रो स्टेशन, भीड़भाड़ वाले बाजार, बस अड्डे और रेलवे स्टेशन। चोरी के बाद ये फोन एक खास गैंग तक पहुंचाए जाते थे, जहां टेक्निकल एक्सपर्ट उनका IMEI नंबर बदलते थे ताकि फोन ट्रैक न किया जा सके। इसके बाद इन फोनों को पैक करके नेपाल, बांग्लादेश, दुबई और अफ्रीकी देशों तक भेजा जाता था। वहां ये बिल्कुल नए फोन की तरह बेचे जाते थे और दोगुनी-तिगुनी कीमत वसूली जाती थी।
इस गिरोह की सच्चाई तब सामने आई जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कुछ लोग बड़ी संख्या में चोरी के फोन विदेश भेजने की तैयारी कर रहे हैं। स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच ने जाल बिछाकर छापेमारी की। जब पुलिस ने छापेमारी की तो अंदर का नजारा देखकर सब हैरान रह गए। कमरे में बड़े-बड़े बैग रखे थे और उन बैगों में सिर्फ मोबाइल फोन भरे हुए थे। iPhone, Samsung, OnePlus, Xiaomi और अन्य ब्रांड के फोन लाइन से रखे थे। ऐसा लग रहा था जैसे किसी मोबाइल शोरूम का स्टॉक सामने रख दिया गया हो। गिनती की गई तो करीब 420 फोन निकले और उनकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपये आंकी गई।
पुलिस ने मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि वे कई महीनों से इस धंधे में शामिल हैं और चोरी के मोबाइल विदेश भेजना उनका नियमित काम बन गया था। वे दिल्ली के अलावा एनसीआर और अन्य बड़े शहरों से भी फोन मंगवाते थे। गिरोह में अलग-अलग लोग अलग-अलग भूमिकाएं निभाते थे। कोई फोन चोरी करता, कोई उनका IMEI बदलता, कोई पैकिंग और ट्रांसपोर्ट का काम करता और कोई विदेश भेजने के कॉन्टैक्ट्स मैनेज करता
यह घटना एक बड़ा सबक भी देती है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर मोबाइल संभालकर रखें, खासकर मेट्रो और बाजार में। इसके अलावा सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदते समय हमेशा बिल और IMEI नंबर चेक करें। कई बार लोग सस्ते दाम में फोन खरीद लेते हैं और बाद में पता चलता है कि वह चोरी का है। इससे न सिर्फ पैसे का नुकसान होता है, बल्कि कानूनी झंझट भी खड़ा हो सकता है।

